जागरण संवाददाता, धनबाद : डीजल पर वैट को युक्तिसंगत करने के संबंध में झारखंड पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने रविवार को मुख्यमंत्री तथा ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम को ज्ञापन सौंपा। इसके पूर्व इस विषय पर द्विपक्षीय वार्ता और बैठक के अलावा विभिन्न विभाग प्रमुखों के साथ कई बार पत्राचार हो चुका है। चूंकि यह मुद्दा राज्यहित, जनमानस और पेट्रोलियम सेक्टर के लिए लाभकारी है। सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक सिंह तथा कोलफिल्ड पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के महासचिव संजीव राणा ने कहा कि पड़ोसी राज्य में वैट कम होने की वजह से झारखंड में स्थापित उद्योगों द्वारा प्रतिमाह 30 हजार के एल डीजल का आयात सिर्फ पश्चिम बंगाल से कर यहां खपत की जा रही है। पूर्व में फार्म सी के प्रावधान के कारण मात्र दो प्रतिशत टैक्स का भुगतान कर झारखंड के उद्यमी पड़ोसी राज्यों से रियायती दर पर डीजल का उठाव करते थे। केंद्र सरकार द्वारा इस प्रावधान को खत्म कर दिए जाने से ऐसी उम्मीद जगी थी कि पड़ोसी राज्यों से डीजल का आयात बंद हो जाएगा और झारखंड में संचालित उद्योग धंधों के मालिक अपने ही राज्य से डीजल की खरीद और खपत करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जिसका नतीजा है कि झारखंड की कीमत पर बंगाल इसका लाभ उठाता रहा है। बंगाल में आज भी 17 प्रतिशत वैट के अतिरिक्त वैट पर 20 प्रतिशत अतिरिक्त कर है, जो झारखंड से सस्ता है। अब स्थिति है कि झारखंड के उद्यमी बंगाल से डीजल की आयात कर खपत को प्राथमिकता दे रहे हैं। एसोसिएशन का सुझाव है कि झारखंड में 22 प्रतिशत वैट की दर को घटाकर इसे बंगाल के समतुल्य किया जाए। इस प्रकार झारखंड में डीजल की बिक्री में आई गिरावट की क्षतिपूर्ति संभव है।