धनबाद/गिरिडीह, जेएनएन। International E-ticketing Racket अंतरराष्ट्रीय ई-टिकटिंग रैकेट में शामिल सरिया एवं बिरनी के दो आरोपितों मो. कलीम एवं शमीम अख्तर को रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने गिरफ्तार कर लिया। कलीम को सरिया थाना अंतर्गत मोकामो स्थित आवास से तथा शमीम की बिरनी थाना अंतर्गत गैंडो स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया। तीसरा आरोपित धीरेंद्र यादव उर्फ रिंकू भागने में सफल रहा। आरपीएफ ने बगोदर थाना अंतर्गत चौधरीबान्ध कोल्हा गोलगो स्थित उसके आवास पर भी छापेमारी की थी। 

तीनों आरोपितों के आवास से तीन लैपटॉप, तीन मोबाइल व तीन डोंगल जब्त की गई है। इसके अलावा एक अन्य फरार आरोपित के आवास से एक लैपटॉप जब्त हुई है। कुल चार लैपटॉप जब्त हुई है। गिरफ्तार दोनों आरोपितों को आरपीएफ ने बुधवार को रेल अदालत धनबाद में पेश किया। इस मामले के एक प्रमुख आरोपित बिरनी के गुलाम मुस्तफा को सुरक्षा एजेंसियों ने भुनेश्वर से गिरफ्तार किया था। मुस्तफा की गिरफ्तारी के बाद इस अंतरराष्ट्रीय रैकेट में शामिल आरोपितों के नाम उजागर हुए। 

सुरक्षा एजेंसियों से मिली जानकारी एवं रेलवे बोर्ड के निर्देश के बाद आरपीएफ की हज़ारीबाग़ रोड, धनबाद एवं गोमो की संयुक्त टीम गिरीडीह में गुप्त रूप से लगातार छापेमारी कर रही थी। सबसे पहले 20 जनवरी को सरिया के कलीम को गिरफ्तार किया गया। उसके बाद बुधवार की सुबह शमीम पकड़ा गया। 

आरपीएफ इंस्पेक्टर पंकज कुमार ने बताया कि इस मामले को लेकर एक सप्ताह से छापामारी की जा रही है। फरार एक अन्य आरोपित चौधरीबान्ध निवासी अमित कुमार के आवास से भी एक लेपटॉप जब्त की गई है। जब्त लेपटॉप से धनबाद की तकनीकी सेल की टीम सॉफ्टवेयर व अन्य चीजों को खंगाल रही है। इस मामले में लगभग एक दर्जन ठिकानों पर छापेमारी की गई है। गिरफ्तारी के बाद भी आधा दर्जन लोग ऐसे हैं जिनपर विभाग की विशेष नजर है। इंस्पेक्टर ने बताया कि सबीना खातुन रैकेट किंग गुलाम मुस्तफा की पत्नी है, जिसका काम क्षेत्र में सॉफ्टवेयर बेचने का है। इसने अपना पता बिरनी ,सरिया एवं बेंगलुरु दे रखी है।

हवाला, आतंकी फंडिंग से जुड़े रेलवे ई-टिकटिंग रैकेट के तार

ई-टिकटिंग रैकेट के तार दुबई, पाकिस्तान, बांग्लादेश, सिंगापुर और यूगोस्लाविया में हवाला, मनी लांडिंग और आतंकी फंडिंग से जुड़े हैं। इस सिलसिले में एजेंसियों ने ई-टिकट बुकिंग सॉफ्टवेयर बेचने वाले गुलाम मुस्तफा समेत 27 लोगों को गिरफ्तार किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आंतरिक सुरक्षा को खतरे के कोण से पूरे मामले की जांच हो रही है। आइबी और एनआइए ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है। गिरफ्तार लोगों पर संगठित अपराध नियंत्रण कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।

मुस्तफा के पास से मिली आइआरसीटीसी की 563 आइडी 

आरपीएफ के महानिदेशक अरुण कुमार ने दिल्ली में मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि भुवनेश्वर से गिफ्तार गुलाम मुस्तफा ने अपने धंधे की शुरुआत 2015 में आइआरसीटीसी एजेंट के रूप में की थी। बाद में भारत से दुबई गए हामिद अशरफ के संपर्क में आकर उसने ई-टिकटों की गैरकानूनी बिक्री का काम शुरू किया। कुमार ने बताया कि आरपीएफ द्वारा बेंगलुरु में डाले गए कई छापों में बार-बार मुस्तफा का नाम आ रहा था। नेटवर्क से जुड़े 20 हजार रेलवे एजेंटों को अभी नहीं छुआ गया है। मुस्तफा के पास से आइआरसीटीसी की 563 आइडी मिली है।

गिरिडीह का गुलाम मुस्तफा बेंगलुरु से करता है संचालन

गुलाम मुस्तफा बेंगलुरु से रैकेट का संचालन करता है। वह गिरिडीह का निवासी है। उसकी कोई औपचारिक शिक्षा नहीं हुई है। केवल ओडिशा के मदरसे में पढ़ाई की है। बेंगलुरु में टिकटों की दलाली से धंधे की शुरुआत की। बाद में ई-टिकट एजेंट बना और फिर गैरकानूनी सॉफ्टवेयर बेचने लगा। वह सॉफ्टवेयर का जानकार है। डार्कनेट में पहुंच के लिए अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करता है। इसके लैपटॉप में लाइनक्स आधारित हैकिंग सिस्टम पाया गया। बिट क्वाइन और अन्य क्रिप्टो करेंसी का कारोबार भी करता है। 

Posted By: Sagar Singh

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