झरिया, जेएनएन। हर साल दिवाली में होने वाले पटाखों से शोर और प्रदूषण में कमी लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से लेकर राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की तरफ से कदम उठाए जाते हैं। पटाखे चलाने को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। इसके बावजूद जब दिवाली के बाद वायु प्रदूषण का स्तर मापा जाता है तो बढ़ा रहता है। अबकी दिवाली में पटाखों के शोर कम होने के आसार हैं। हालांकि इसका कारण कुछ और है। कोर्ट और सरकार की बंदिशें नहीं।

धनबाद कोयलांचल समेत पूरे देश में तमिलनाडू के शिवकाशी से पटाखों की बडी़ खेप की आपूर्ति होती है। लगभग पांच माह से शिवकाशी स्थित ज्यादातर पटाखों के कारखने बंद पड़े हैं। इस कारण पटाखों का निर्माण और आपूर्ति प्रभावित हैं। झरिया कोयलांचल में भी पटाखों का आवक कम हुआ है। आवक कम होने से पटाखों की कीमतें उछाल पर हैं। अबकी पिछले साल के मुकाबले दोगुनी कीमत पर पटाखें बिक रहे हैं। झरिया उपरकुल्ही में वर्षों से पटाखों की दुकान चलाने वाले बाबर पटाखावाला कहते हैं-शिवकाशी के कारखानों को सरकार द्वारा बंद करने की वजह पटाखे काफी मंहगे हो गए हैं। पांच माह तक कारखानों को बंद रखने की वजह से इस वर्ष प्रयाप्त मात्रा में पटाखों को कोयलांचल के बाजारों में नहीं उतारा जा सका है। सरकार ने बंदिशें भी बहुत लगा रखी है। नियमों का पालन करते हुए कम आवाज के पटाखों को बाजार में बेचा जा रहा है। इन सब कारणों से अब तक पटाखों के कारोबार का रंग नहीं चढ़ा है। पहले दिवाली से 10 दिन पहले से ही लोगों में खरीदारी करने का रंग चढ़ जाता था। अबकी ऐसा देखने को नहीं मिल रहा है।

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