धनबाद [ रोहित कर्ण ]। लॉकडाउन से बस दो ही दिन पहले कोल इंडिया चेयरमैन धनबाद में थे। उन्होंने बीसीसीएल मुख्यालय कोयला भवन में अधिकारियों के साथ मीटिंग की। एनटी-एसटी प्रोजेक्ट, गोकुल पार्क, मुनीडीह समेत हर उस स्पॉट पर गए जहां बीसीसीएल के अधिकारी अपने सम्मानित अतिथियों को टहलाते हैं। कुर्सी संभालने के बाद वे सभी सहयोगी कंपनियों के दौरे पर थे। अन्य की तो नहीं कह सकते, मगर बीसीसीएल ने उन्हें कंपनी की वास्तविक स्थिति से पूरी तरह रू-ब-रू कराया। जो जैसा था बिल्कुल वैसा ही दिखाया। कोई बनावट नहीं। बसंत में पतझड़ की तरह उजाड़ दिख रहे कोयला नगर को भी यूं ही रहने दिया गया। सड़कों पर एक-एक गड्ढे से चेयरमैन वाकिफ हुए। वह दौर गया कि चेयरमैन के लिए पलक पांवरे बिछाए जाते थे। पतझड़ के मौसम में बसंत का उल्लास छा जाता था। अब तो जो जैसे है, वैसा ही रहेगा। कोई फर्क नहीं पड़ता।

सर को कोरोना प्रणाम

सर को कोरोना प्रणाम। यह जुमला कोयला भवन में आम हो चला है। प्रत्युत्तर में कोरोना प्रणाम के साथ ही चरणामृत की तरह दो बूंद सैनिटाइजर गिरा दिया जाता है और आगंतुक सप्रेम उसे हाथों पर मल लेते हैं। मुख्यालय में कोविड- 19 को लेकर कुछ ऐसा ही माहौल है। कोरोना वायरस के हमले में भी बीसीसीएलकर्मी मनोयोग से देश का ऊर्जा भंडार भर रहे हैं। जब लोग घरों में बैठकर वायरस के संक्रमण से बचने के प्रयास में लगे हैं, श्रमिक खदानों में कोयला उत्पादन में जुटे हैं। भले डिस्पैच रोज घट रहा हो। हां, इतना जरूर है कि ऑफिसों में कुछ निश्चिंतता का भाव आया है। प्रशासनिक अफसरों, कंपनी पदाधिकारियों की मीटिंग अनवरत जारी है। जहां कुछ सवाल-जवाब की आशंका हो, वहां शारीरिक दूरी का जुमला उसी तरह दुहरा दिया जाता है जैसे कभी दूरदर्शन पर रुकावट के लिए खेद है, चस्पा होता था।

संदेश पर भी वायरस वार 

कोरोना वायरस यानि सोशल मीडिया पर सबसे आगे। अफवाह की गति भी तेज। वायरस ने इंटरनेट की गति से दुनिया में फैलकर उसे लॉकडाउन कर दिया, लेकिन उससे बचाव के लिए अपनाए जाने वाले निर्देश अभी तक क्षेत्रीय कार्यालयों में पहुंच ही रहे हैं। ऐसा ही एक निर्देश जब क्षेत्रीय कार्यालय में पहुंचा तो वहां के अधिकारी चौंक गए। वजह जिस मुद्दे पर उन्हें सचेत किया गया था उस पर अब देश लॉकडाउन है। यह निर्देश मुख्यालय से 21 मार्च को ही चला लेकिन क्षेत्रीय कार्यालय में 30 को पहुंच सका। वह भी तब जबकि लॉकडाउन के इस दौर में सड़कें खाली पड़ी हैं। एंबुलेंस को भी सायरन बजाने की जरूरत नहीं पड़ती। दूरी भी ज्यादा नहीं। इससे जल्दी तो कोई हरकारा पैदल ही संदेश पहुंचा देता। मगर, कहावत भी है- बीसीसीएल धनबाद का हाथी जो है। वह अपनी मस्ती में चलता है। कमाल है।

सार्वजनिक बनाम निजी कंपनी

कोरोना वायरस ने सार्वजनिक बनाम निजी कंपनियों की चर्चा को सिरे से परवान चढ़ा रखा है। यूं तो देशभर में अलग-अलग दलीलें दी जा रही हैं, लेकिन धनबाद में कोयला सेक्टर पर ही चर्चा होगी। यहां आउटसोर्सिंग कंपनियां ही अब तक उत्पादन का पर्याय बनी हुई थीं। वायरस ने उनको हिसाब में ला दिया। यहां मजदूरों के लिए आवास की व्यवस्था है, न यातायात की। सामाजिक सुरक्षा की भी कोई गारंटी नहीं। जैसे ही लॉकडाउन शुरू हुआ, कंपनी के कर्मचारियों की संख्या गिरी तो गिरती चली गई। परिणाम यह रहा कि सबसे पुरानी डेको कंपनी को फुलारीटांड़ में अपना काम रोक देना पड़ा। वजह यह कि ड्राइवर, खलासी व ऑपरेटर जैसे कर्मचारी नहीं आ रहे। अब सुपरवाइजरी स्टाफ के जरिए तो काम होने से रहा। यही हाल कई अन्य आउटसोर्सिंग कंपनियों का भी है। दूसरी तरफ परमानेंट स्टाफ लॉकडाउन में भी उत्पादन दिवस मना रहे हैं।

Posted By: Mritunjay

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