धनबाद, जेएनएन। कोयला उद्योग में 100 फीसद FDI के विरोध में केंद्र सरकार के खिलाफ मजदूर संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। पहला मोर्चा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अनुषंगी इकाई भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ (एबीकेएमएस) की तरफ से खोला गया है। संघ ने कोयला उद्योग में पांच दिवसीय (23 से 27 सितंबर) हड़ताल की घोषणा की है। सोमवार सुबह हड़ताल शुरू हुई। धनबाद कोयलांचल में कोल इंडिया की बीसीसीएल और ईसीएल की कोयला खदानें हैं। एबीकेएमएस के पदाधिकारी हड़ताल को सफल बनाने के लिए सोमवार सुबह ही कोलियरी क्षेत्रों में सक्रिय हैं। हालांकि हड़ताल का कुछ खास असर नहीं दिख रहा है।

हड़ताल को सफल बनाने के लिए सोमवार को प्रथम पाली में बीएमएस समर्थक कोयला मजदूरों ने जगह-जगह जुलूस निकाल कर विरोध दर्ज प्रदर्शन किया। बीसीसीएल व ईसीएल की कोलियरियों में इसका असर मिला-जुला देखने को मिल रहा है। वहीं कई परियोजना क्षेत्रों में प्रथम पाली में उपस्थिति सामान्य रही। बीसीसीएल की गोविंदपुर, बरोरा, ब्लॉक फॉर, पीबी सहित कई एरिया में हड़ताल समर्थकों ने बंद  किया, लेकिन कुछ समय के बाद स्थिति सामान्य हो गई। गोविंदपुर एरिया के ब्लॉक फोर व ब्लॉक टू में उत्पाद ठप है। प्रबंधन चालू कराने का प्रयास कर रहा है। अधिकारियों की टीम सुबह से कोलियरी पीट पर हाजिरी बनाने को लेकर तैयार दिखी। सीआइएसएफ के जवान भी संवेदनशील स्थानों पर मोर्चा संभाल रखा है।

हड़ताल का असर नहींः बीसीसीएल के डीपी आरएस महापात्रा ने बताया कि स्थिति सामन्य है। सिर्फ दो परियोजना प्रभावित है। जिसे चालू कराने का प्रयास किया जा रहा है।

पुलिस-प्रशासन के बल पर मजदूरों का हो रहा दमनः  बीएमएस नेता महेंद्र सिंह ने कहा हड़ताल का असर मिला-जुला है। हड़ताल को विफल करने के लिए प्रबंधन ने पूरी ताकत झोंक दी है। पुलिस-प्रशासन को हथियार बनाकर मजदूरों को धमकाया जा रहा है। कोयला उद्योग को बचाने के लिए मजदूरों को एक जुट होकर विरोध करना पड़ेगा।

 

Posted By: Mritunjay

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