धनबाद, जेएनएन। इस समय झारखंड में कोई चुनाव नहीं है। बावजूद झारखंड भाजपा के सभी प्रमुख नेताओं के बैठकखाने में चुनावी चर्चा हो रही है। चर्चा के केंद्र में है-छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव। परिणाम क्या होगा? क्या भाजपा और मुख्यमंत्री रमण सिंह की वापसी होगी? वापसी होगी तो उसका झारखंड की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा? वगैरह-वगैरह। 

दरअसल, छत्तीसगढ़ में भाजपा की चुनावी राजनीति से झारखंड का कनेक्शन जुड़ा है। केंद्रीय नेतृत्व ने झारखंड भाजपा के प्रशिक्षण प्रमुख गणेश मिश्र को छत्तीसगढ़ में महत्वपूर्ण जिम्मेवारी सौंपी है। मिश्र को सरगुजा संभाग का प्रभारी बनाया गया है। वे अपने समर्थकों के साथ सरगुजा में कैंप कर भाजपा प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए चुनावी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। मिश्र चुनावी रणनीति बनाने के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं।

जीती हुई सीटें बचाने और बढ़त लेने की चुनौती : सरगुजा संभाग में पांच जिले हैं-जशपुर, अंबिकापुर, बलरामपुर, सूरजपुर और कोरिया। यहां विधानसभा की 14 सीटें हैं, जिनमें फिलहाल भाजपा के पास 7 हैं। चुनाव में पिछली बार की जीती हुईं सात सीटें बचाने और बढ़त लेने की चुनौती गणेश मिश्र के सामने हैं। भाजपा पिछले दो चुनावों से मिश्र को छत्तीसगढ़ के मोर्चे पर तैनात करती रही है। वह 2008 और 2013 के चुनाव में भी छत्तीसगढ़ में प्रभारी बनाए गए थे। हालांकि तब वह सिर्फ एक जिला-कोरिया के प्रभारी थे। अबकी संभाग के प्रभारी बनाए गए हैं जिसके तहत पांच जिलों को संभालना है। 

गुमला को छूती छत्तीसगढ़ की सीमा: झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमा एक-दूसरे से लगी हुई है। झारखंड का गुमला और छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की  सीमा एक-दूसरे से लगी हुई है। सीमावर्ती क्षेत्रों में एक-दूसरे राज्य की राजनीति थोड़ी-बहुत प्रभावित करती है। सरगुजा संभाग में 20 नवंबर को विधानसभा का चुनाव है। मिश्र का छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमण सिंह और भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री सौदान सिंह से अच्छे संबंध हैं। सरगुजा संभाग में भाजपा का प्रदर्शन अच्छा रहा तो मिश्र का संगठन में राजनीतिक कद और बढ़ेगा। यही कारण है कि झारखंड भाजपा के तमाम बड़े नेताओं की नजरें छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव पर टिकी हैं। मिश्र धनबाद जिले की निरसा विधानसभा क्षेत्र की राजनीति करते हैं। 

छत्तीसगढ़ में फिर भाजपा सरकार बनने का दावा : झारखंड प्रदेश भाजपा के प्रशिक्षण प्रमुख गणेश मिश्र ने दावा किया है कि छत्तीसगढ़  में फिर से भाजपा की सरकार बनेगी। वह तीन प्रमुख कारणों के आधार पर भाजपा की जीत का दावा करते हैं। पहला-जनता में छत्तीसगढ़ सरकार का विरोध नहीं है। दूसरा-मुख्यमंत्री रमण सिंह का जनता में विरोध नहीं है। तीसरा-जमीनी स्तर पर भाजपा का संगठन मजबूत है। 

 

Posted By: mritunjay

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