धनबाद[अश्विनी रघुवंशी ]। झारखंड के धनबाद में एक साइबर ठग को जिंदगी ने कुछ ऐसे ठगा कि वह जिंदा तो है, मगर मायूसी के सिवा उसके पास कुछ नहीं बचा। अपराध की बुनियाद पर खुशहाल जिंदगी की इमारत को बुलंद करने की उसकी ख्वाहिश ने एक मासूम को बेमौत मार दिया। बच्चे की मौत ने राज उगले तो उसकी मुहब्बत उससे छिन गई। प्रेमिका की मौत से टूट गए ठग ने भी जान देने की कोशिश की, मगर बच गया। किसी ने सच ही कहा है कि अपराध का रास्ता भले ही चकाचौंध से भरा हो, मगर वह अंधेरों में जाकर ही खत्म होता है। ऐसा ही हुआ है मनोज चौहान के साथ। अब वह सलाखों के पीछे है।

धनबाद के खास सिजुआ में रहने वाला कारू रजवार कोयला ढोकर दो वक्त की रोटी जुटाता है। उसका एक ही बेटा था आर्यन। कक्षा दो में पढ़ता था। हमेशा उसकी खिलखिलाहट मोहल्ले में गूंजती रहती थी। 16 अगस्त को उसकी मौत हो गई। पुलिस तक मामला पहुंचा तो उसने पड़ताल शुरू की। इस दौरान उसे बताया गया कि किसी नुकीली वस्तु के लगने से उसकी मौत हो गई है। तेतुलमारी पुलिस ने बारीकी से पड़ताल की तो कई चौकाने वाली जानकारियां सामने आईं। इस दौरान पता चला कि नुकीली वस्तु से नहीं बल्कि गोली लगने से मौत हुई है। इसके बाद पुलिस के कान खड़े हो गए। उसने पड़ताल का एंगल बदल दिया। इस दौरान आर्यन के फुफेरे भाई राजेश ने पुलिस को पड़ोस में रहने वाले साइबर अपराधी मनोज और उसके अवैध हथियारों के बारे में जानकारी दी। उसने बताया कि मनोज एक साइबर अपराधी है, जिसने न जाने कितने लोगों को ठगा है।

अपराधिक प्रवृत्ति का मनोज अवैध हथियार भी रखता था, मगर अपने घर के बजाय आर्यन के घर में। प्रतिदिन की तरह 16 अगस्त को आर्यन स्कूल से लौटा तो उसके साथ कुछ साथी भी थे। मनोज का काला बैग घर में पड़ा था। वह खेल-खेल में उसे उठा लाया। आर्यन ने पिस्टल देखी तो बैग से निकाल ली। इसी बीच अचानक तेज आवाज के साथ गोली निकली और उसके चेहरे में जा धंसी।

यह पता होने के बाद पुलिस की पड़ताल की दिशा बदल दी। इस दौरान आर्यन के घर में पुलिस को साइबर अपराध में प्रयोग होने वाले कुछ उपकरण भी मिले। पुलिस ने मनोज की कॉल डिटेल खंगाली तो चौंक गई। आर्यन की मौत के दिन मनोज ने पड़ोस के किराना दुकानदार अनिल बर्णवाल के मोबाइल पर नौ बार बात की थी। पुलिस ने अनिल से पूछताछ की तो उसने बताया कि मनोज से उसकी बात नहीं हुई है। कॉल डिटेल की जानकारी देने पर अनिल का जवाब था कि शायद घर वालों से बात हुई हो। अनिल ने घर आकर कॉल डिटेल के बारे में पत्नी और बेटी से पूछताछ की। इसके अगले दिन पुलिस अनिल की पत्नी और बेटी को थाने लाने के लिए पहुंची तो बेटी नेहा ने पुलिस वालों को देख खुद को कमरे में बंद कर लिया और फंदे पर झूल गई। नेहा की अर्थी सज ही रही थी कि मनोज चौहान के घर से रोने की आवाज आई। हल्ला हुआ कि मनोज ने गया (बिहार) स्थित पैतृक गांव में जहर खा लिया है।

पुलिस को यकीन हो गया था कि नेहा और मनोज के बीच कुछ है। शायद मोहब्बत। शादीशुदा मनोज से मोहब्बत का पर्दाफाश होने के डर से ही नेहा ने जान दे दी। उसकी अर्थी उठी तो मनोज टूट गया। यही वजह है कि उसने जहर खा लिया। गया में इलाज के बाद धनबाद पुलिस ने जब उससे बात की तो उसने बताया कि आर्यन को जब गोली लगी तो वह तड़प उठा। आर्यन के दोस्त डर कर भाग गए और गली मेें आकर शोर मचाया। उस दौरान वह भी गली में ही था। भाग कर अंदर गया तो देखा आर्यन छटपटा रहा था। नुकीली चीज से आर्यन को लगी गोली निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक वह निष्प्राण हो चुका था। ऐसे में कमरे में ही बोरे के नीचे शव ढका और पिस्टल लेकर भाग निकला। बाद में प्रेमिका के भी आत्महत्या करने से मेरी दुनिया ही उजड़ गई। यही वजह है कि मैैंने भी जहर खाकर खुद की जान देने की कोशिश की।

आर्यन की मौत के लिए साइबर अपराधी मनोज चौहान जिम्मेदार है। उसके कारण दो जानें गईं। मनोज को कड़ी सजा दिलाने की कोशिश की जाएगी।

-किशोर कौशल, एसएसपी, धनबाद

Posted By: Mritunjay

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