धनबाद [राजीव शुक्ला]। श्रीराम दुबे। कोयलांचल के इस युवक की पहचान आज के उस द्रोणाचार्य के रूप में बन चुकी है जो गांव की गरीब और आदिवासी बेटियों को क्रिकेट का निश्शुल्क प्रशिक्षण देने में जुटा है। उसकी लगन और मेहनत का ही परिणाम है कि सुदूर गांवों की आठ लड़कियां राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट में अपनी प्रतिभा का डंका बजा रहीं हैं।

दुबे खुद भी बिनोवा भावे विश्वविद्यालय क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। हालांकि उन्होंने खेल प्रशिक्षक की कोई डिग्री तो नहीं ली है। बावजूद उनकी उपलब्धियां उन्हें ख्यातिप्राप्त प्रशिक्षकों के समकक्ष पहुंचा रहीं हैं। वे कहते हैं कि ये तो हमारी बेटियों जैसी हैं। गरीबी ने इनकी प्रतिभा को छिपा दिया था। पर, इनका कौशल पहचानकर मेहनत की, तो नतीजा सामने है। ये इस खेल में देश का प्रतिनिधित्व करें, बेहतर नागरिक बनें, यही हमारी गुरुदक्षिणा होगी। वर्तमान में वे 27 लड़कियों को रोज छह घंटे का प्रशिक्षण बलियापुर में दे रहे हैं।

ऐसे मिली प्रेरणा : श्रीराम बताते हैं कि करीब छह वर्ष पहले की बात है। धनबाद में कुछ साथियों के साथ बैठे थे। इसी दौरान क्रिकेट में महिलाओं के योगदान पर चर्चा होने लगी। कुछ दोस्तों ने कहा कि धनबाद के ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियां क्रिकेट के प्रति उदासीन हैं। वहां इस खेल का कोई स्कोप नहीं। बस बात मन को छू गई। जिले के ग्रामीण क्षेत्र बलियापुर के कई गांवों का भ्रमण किया। लड़कियों को क्रिकेट के लिए प्रेरित किया। बस कई बच्चियों ने उत्साह दिखाया। तब बलियापुर के रघुनाथपुर मैदान में स्व. पीएल ग्रोवर को¨चग कैंप की शुरुआत की। वहां कई गांवों की लड़कियां आने लगीं। आज यहां 27 लड़कियां आ रहीं हैं।

बाधाएं आई पर डिगे नहीं : प्रशिक्षण शुरू हो गया पर इसमें बाधाएं भी आने लगीं। खेल सामग्री का जुगाड़ कैसे हो। लड़कियों को चना व फल कैसे दिलाएं। दरअसल यहां आने वाली लड़कियां बेहद गरीब परिवारों से हैं। वे खिलाड़ी तो हैं पर उनको फल और पौष्टिक भोजन तो दूर दो वक्त माड़ भात और रोटी गुड़ मिल जाए तो बड़ी बात है। ऐसे में राकेश ग्रोवर, डॉ. ओपी अग्रवाल, कौशिक दास जैसे लोगों ने मदद की। खेल सामग्री के साथ बच्चियों के लिए चना की व्यवस्था कर ली। हाल में कुछ अराजक तत्वों ने रघुनाथपुर गांव के खेल मैदान में खेलने से रोका। तब झारखंड पब्लिक स्कूल प्रबंधन ने सहयोग किया और अपना खेल मैदान उपलब्ध कराया। कैंप की पुष्पा महतो, किरण कुमारी महतो, सुमन कुमारी जिले की टीम में हैं। अनीता मांझी, उर्मिला सोरेन और मीरा स्टेट टीम में स्टैंड बाई रहीं। इन लड़कियों ने फहराया राष्ट्रीय स्तर पर परचम

रूमा कुमारी महतो : झारखंड स्टेट सीनियर टीम का प्रतिनिधित्व कर रही है।

दुर्गा कुमारी मुर्मू: ईस्ट जोन व झारखंड स्टेट टीम की सदस्य है।

सुनीता मुर्मू: अंडर-19 स्टेट टीम का प्रतिनिधित्व किया।

किरण कुमारी : अंडर -16 स्टेट टीम का प्रतिनिधित्व कर रही है।

लक्ष्मी : अंडर-16 स्टेट टीम की सदस्य है।

Posted By: Jagran

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