धनबाद, [तापस बनर्जी]। दिल्ली में बीकॉम एकाउंटेंसी की पढ़ाई कर रहा हूं। कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए मैंने मेट्रो का सफर बंद कर दिया था। अपनों से दूरी बनाकर रख रहा था। मुझे कहां मालूम था कि जिस ट्रेन से आ रहा हूं, उसके सहयात्री कोरोना पॉजिटिव होंगे। जब जानकारी मिली उसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल के क्वारंटाइन वार्ड में एडमिट करा दिया। पांच दिन का एक-एक पल बड़ी मुश्किल से गुजरा। पर जब रिपोर्ट आ गयी तो पता चला कि मैंने जंग जीत ली है।

यह कहानी है सुगियाडीह के रहने वाले श्रेयस लाल दास की। श्रेयस वही शख्स हैं जो नई दिल्ली सियालदह राजधानी एक्सप्रेस से 19 मार्च को धनबाद लौटे थे। वह बी-9 के उसी कोच पर सवार थे जिसमें पश्चिम बंगाल के चार कोरोना पॉजिटिव महिलाएं सवार थीं।

संयमित खान पान जरूरी : श्रेयस कहते हैं कि किसी भी बीमारी से जीतने के लिए संयमित खान पान जरूरी है। इससे भी ज्यादा जरूरी अपने बॉडी के इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरोधक क्षमता को बनाये रखना है। उन्होंने बताया कि क्वारंटाइन के दौरान सामान्य खान पान ही रहा। इससे उन्हें ठीक होने में काफी मदद मिली।

घर लौटकर मां का पैर भी नहीं छू सके थे : आम तौर पर बच्चे घर लौटकर बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं। पर श्रेयस घर लौटकर अपनी मां का पैर भी नहीं छू सके। सोशल डिस्टनसिंग (शारीरिक दूरी) को बरकरार रखा।

गाने और कविता लिखने का शौक अब करेंगे पूरा : श्रेयस गाने और कविता लिखने के शौकीन हैं। जब वक्त मिलता है, लिखने बैठ जाते हैं। मगर, गुजरे 15 दिन उन पर काफी मानसिक तनाव वाला था। इस वजह से इनके बारे में सोच भी नहीं सके। अब परिस्थितियां सामान्य होने के बाद लॉकडाउन का सदुपयोग करने की ख्वाहिश है।

Posted By: Sagar Singh

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