धनबाद, जेएनएन : देखते देखते एक साल गुजर गया। वह 17 अप्रैल 2020 था जब धनबाद में कोरोना संक्रमित पहला रेलकर्मी मिला था। पहले रेलकर्मी होने के साथ-साथ वह धनबाद जिले का पहला कोरोना पॉजिटिव मरीज भी था। उस रेलकर्मी के पॉजिटिव मिलते ही पूरे जिले में हलचल मच गई थी। जिला प्रशासन ने आपात निर्णय लेकर हीरापुर क्षेत्र को कंटेनमेंट एरिया में तब्दील कर दिया था। जिस डीएस कॉलोनी में पॉजिटिव रेलकर्मी रहता था वहां 28 दिनों के लिए कर्फ्यू लग गया था। उस रेलकर्मी के बोकारो जिले के चास से आने जाने और उसी दौरान संक्रमित होने की बात सामने आई थी। हालांकि कर्मचारी बार-बार यही कहता रहा कि वह बिल्कुल ठीक है और यहां तक कि उसके ठीक होने के बाद भी यह पता नहीं चल पाया कि आखिर वह कहां संक्रमित हुआ था। 

वह कोरोना का पहला दौर था। जिसमें तत्कालीन डीआरएम अनिल कुमार मिश्रा तक संक्रमित हो गए थे। अब दूसरा दौर शुरू हो चुका है जो पहले से भी ज्यादा घातक और जानलेवा है। इसकी चपेट में धनबाद रेल मंडल के तकरीबन 100 लोग आ गए हैं। इनमें 7 रेलवे के अफसर हैं और 91 रेल कर्मचारी। रेलवे के जिन अफसरों को कोरोना ने अपनी गिरफ्त में लिया है। उनमें इंजीनियरिंग विभाग के दो अधिकारी समेत सिग्नल और मैकेनिकल विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं। इसके साथ ही झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश तक फैले रेल मंडल के अलग-अलग विभागों के 91 कर्मचारी कोरोना वायरस की गिरफ्त में आकर जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।

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