बोकारो, जेएनएन। भारतीय इस्पात प्राधिकरण (सेल) के अध्यक्ष अनिल कुमार चौधरी को विश्व बैंक की ओर से नौकरी का ऑफर मिला है। लेकिन, उन्होंने फिलहाल इस प्रस्ताव पर अपनी कोई सहमति नही जतायी है। अध्यक्ष का कार्यकाल कंपनी में 31 दिसंबर 2020 को समाप्त हो रहा है। जबकि सरकार की ओर से नए चेयरमैन के लिए वैकेंसी भी निकाल दी गई है। बावजूद इसके एके चौधरी ने साफ किया है कि वे अपने रिटायरमेंट तक कंपनी की सेवा से अलग नही होंगे। उनके इस निर्णय के बाद सेलकर्मियों के पे रिवीजन समेत अन्य लंबित मसले का समाधान होता अब दिख रहा है। इस बात का दावा एनजेसीएस के श्रमिक नेता भी कर रहे है।

क्रांतिकारी इस्पात मजदूर संघ के महामंत्री सह एनजेसीएस सदस्य राजेन्द्र सिंह ने कहा की 6 फरवरी को नई दिल्ली में सेल अध्यक्ष के साथ वार्ता में कई मसलों पर चर्चा हुई।लेकिन अध्यक्ष ने स्वयं संयंत्रकर्मियों के पदनाम व पे रिवीजन लागू करने को प्राथमिकता बताया। कहा कि 4 मार्च को प्रबंधन व एनजेसीएस की पहली बैठक के बाद जून माह तक हर हाल में वेतन पुनरीक्षण कर लिया जाएगा। इसी तरह 15 फरवरी को संयंत्रकर्मियों के पदनाम में संशोधन के लिए एनजेसीएस सब कमेटी को प्रबंधन पहले अपनी ओर से प्रस्ताव सौपेंगी। जिसके बाद सभी यूनियन प्रतिनिधि अपने-अपने इस्पात संयंत्र में कर्मचारियों से मिलकर उनका राय लेंगे।

इस बीच प्रबंधन ने यह पहले ही साफ कर दिया है कि वे एस-9 ग्रेड से नीचे संवर्ग को किसी भी हाल में जूनियर इंजिनियर का पदनाम नही दे सकते है। सेल में डिप्लोमाधारियों के तर्ज पर अन्य कामगार भी अपने कार्य क्षेत्र में हाई स्कील्ड है। ऐसे में उनकी योग्यता को अनदेखी नही किया जा सकता है। सेल में हर कलस्टर व हर ग्रेड के कर्मियों का पदनाम बदलेगा। मालूम हो कि सेलकर्मियों का पे रिवीजन 1 जनवरी 2017 से लंबित है। जबकि कंपनी में ओटीटी के पद पर काम करने वाले (एस-3) ग्रेड के डिप्लोमाधारी जूनियर इंजिनियर पद की मांग बीते दो वर्षों से कर रहे है।

Posted By: Mritunjay

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