जागरण संवाददाता धनबाद। झारखंड में कोरोना संक्रमण के एक्टिव मामले अभी केवल 831 रह गए हैं। और उनमें धनबाद में महज आठ एक्टिव केस है। यह आंकड़ा आइआइटी (आइएसएम) के रिसर्च स्कॉलर ने दी है। कोरोना के पहले फेज में सभी आइआइटी, एनआइटी, शोध संस्थान अपने रिसर्च स्कॉलर को बुलाने लगे थे। इनमें अधिकांश संस्थानों ने अपने परिसर में ही रिसर्च स्कॉलर के ठहरने की व्यवस्था सभी कोरोना संबंधित दिशा निर्देशों के साथ कर दी थी, ताकि शोध संबंधी कार्य प्रभावित ना हो, लेकिन हमलोग 15 महीने से अपने अपने घरों पर है। यह ईमेल आइआइटी (आइएसएम) धनबाद के रिसर्च स्कॉलर ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, मंत्री बन्ना गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, मुख्यमंत्री के सचिव तथा धनबाद उपायुक्त को भेजा है।

अधिकांश छात्र ले चुके वैक्सीन

छात्रों ने पत्र में लिखा है-बीच में हमें संस्थान बुलाया गया था, लेकिन कोरोना वायरस के दूसरे फेज की स्थिति को देखते हुए रिसर्च स्कॉलर को फिर घर भेज दिया गया। लैब, हाई कंप्यूटेशन सिस्टम, अच्छी इंटरनेट जैसी समस्याओं से रिसर्च स्कॉलर जूझ रहे हैं। आज वैक्सीन उपलब्ध है। रिसर्च स्कॉलर छात्रों में से अधिकांश वैक्सीन भी ले चुके हैं। इस आधार पर कम से कम फाइनल ईयर के पीएचडी विद्यार्थियों को कैंपस बुलाया जाना चाहिए, ताकि वह अपनी थिसिस पूरा कर सके। आइआइटी धनबाद के रिसर्च स्कॉलर ही क्यों अपने घरों पर रहे? 

बिना रिसर्च पेपर के प्रमोट होने पर भविष्य अंधकारमय

विद्यार्थियों ने सवाल उठाया है कि क्या 5 वर्ष पूरे होने के बाद उन्हें स्टाइपेंड मिलेगा ? क्या सरकार पीएचडी विद्यार्थियों को भी प्रमोट करेंगी ? अगर अब आइआइटी नहीं खुली तो समय पर रिसर्च पूरे नहीं हो पाएंगे। बिना बेहतर रिसर्च पेपर के प्रमोट किया भी गया तो भविष्य अंधकार में होगा। छात्रों ने कहा है की अब संस्थान को रिसर्च स्कॉलर को कैंपस बुला लेना चाहिए, ताकि समय पर रिसर्च का काम किया जा सके।

Edited By: Mritunjay