धनबाद : झारखंड मैदान, हीरापुर में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के तत्वावधान में चल रहे पाच दिवसीय श्रीरामचरितमानस एवं गीता ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन सद्गुरु सर्वश्री आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी समीक्षा भारती ने श्रीरामचरितमानस की चौपाई के माध्यम से समझाया। कहा कि हमारे समस्त धार्मिक ग्रंथ एवं महापुरुषों ने ईश्वर की भक्ति को ही मनुष्य सुखी नहीं रह सकता है, पर विडंबना हैं कि आज मनुष्य अपने-अपने तरीके से सभी भक्ति करते हैं फिर भी वह दु:खी है। इसका मूल कारण है कि सभी मन की भक्ति करते हैं। महापुरुषों द्वारा बताए गए शाश्वत भक्ति की वास्तविक विधि को नहीं जानते हैं। कार्यक्रम के अंत में स्वामी धनंजयानंद ने कहा कि दम तोड़ती मानवता को ब्रह्माज्ञान की शीतल फुहार ही बचा सकती है। इसी ज्ञान का प्रचार प्रसार आदि काल से ऋषि मुनियों ने किया और शाश्वत युक्ति द्वारा संपूर्ण समाज को आत्मा का साक्षात्कार कराकर भक्ति की ओर अग्रसर किया।

कहा कि मानव का तन प्राप्त करना परम सौभाग्य है, परंतु इस जीवन को प्राप्त कर मनुष्य शाश्वत भक्ति को नहीं प्राप्त करता हैं या सिर्फ पद प्रतिष्ठा के अहंकार अपना जीवन नष्ट करे तो उसके लिए दुर्भाग्य है। ईश्वर सिर्फ मानने का विषय नहीं बल्कि जानने व देखने का विषय है। कार्यक्रम में प्रीति भारती, सरिता भारती, गुरु भाई रामचंद्र आदि ने सुमधुर भजनों का गायन तथा सुर व लयबद्ध किया।

Posted By: Jagran

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