धनबाद, मृत्युंजय पाठक। बदली परिस्थिति में कोयलांचल का मजबूत राजनीतिक घराना 'सिंह मैंशन' का चेहरा बदल गया है।अब नया चेहरा है-झरिया के विधायक संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह। रागिनी ही बहुचर्चित सूरजदेव सिंह की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाएगी। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी भाजपा के टिकट पर झरिया से विधानसभा चुनाव लड़ाने के संकेत दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में सक्रिय रहने का दिया निर्देशः लोकसभा चुनाव-2019 रागिनी सिंह के लिए एक अवसर के समान आया। और देखते ही देखते वह झरिया और धनबाद भाजपा की राजनीति में छा गई। झारखंड में लोकसभा चुनाव के दौरान 12 सीटों पर भाजपा की जीत के लिए पिछले दिनों रागिनी ने रांची में मुख्यमंत्री रघुवर दास से मिलकर उन्हें बधाई दी। मुख्यमंत्री ने पूछा-झरिया में भाजपा को कितने वोट मिले। जवाब मिला-91 हजार। यह सुन मुख्यमंत्री प्रसन्न हुए। उन्होंने रागिनी को क्षेत्र में सक्रिय रहने के निर्देश दिए। एक तरह से मुख्यमंत्री ने झरिया से रागिनी को भाजपा का टिकट देने का संकेत दिया। झारखंड प्रदेश भाजपा कार्यसमिति के सदस्य सत्येंद्र कुमार कहते हैं-झरिया के विधायक संजीव सिंह जेल में हैं। फिलहाल जमानत की संभावना नहीं है। ऐसे में रागिनी ही चुनाव लड़ेगी।

दो साल से विधायक संजीव सिंह जेल मेंः दरअसल, कांग्रेस नेता धनबाद के पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह समेत चार की हत्या में आरोपित होने के बाद 11 अप्रैल 2017 से विधायक संजीव सिंह जेल में हैं। छह महीने के अंदर विधानसभा चुनाव होना है। संजीव को जमानत मिलने की संभावना नहीं है। ऐसे में बैकअप प्लान के तहत संजीव सिंह और उनका घर 'सिंह मैंशन' ने रागिनी को राजनीति के मैदान में उतार दिया है। हालांकि लोकसभा चुनाव के दौरान यह सब मजबूरी में किया गया। चूंकि, संजीव के भाई सिद्धार्थ गौतम उर्फ मनीष सिंह धनबाद लोकसभा क्षेत्र निर्दलीय चुनाव लड़ गए। ऐसे में जेल में बंद संजीव को भाजपा के प्रति अपनी वफादारी साबित करने के लिए पत्नी को मैदान में उतारना पड़ा। 22 अप्रैल को मुख्यमंत्री रघुवर दास के सामने जिला परिषद मैदान में रागिनी भाजपा में शामिल हुईं। इसके बाद चुनाव के दौरान मंच शेयर करने लगी। संयोग से चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और पीयूष गोयल जैसे बड़े-बड़े नेताओं के साथ रागिनी को मंच शेयर करने का मौका मिला। और वह भाजपा की राजनीति में छा गई।

झरिया में भाजपा को मिली बढ़त से रागिनी का बढ़ा कदः लोकसभा चुनाव के दाैरान झरिया में भाजपा प्रत्याशी पीएन सिंह को 91 हजार वोट मिले। जबकि रागिनी के देवर सिद्धार्थ गाैतम को मात्र तीन हजार। यह विधायक संजीव का जेल से फरमान और उनकी पत्नी रागिनी का भाजपा के प्रति क्षेत्र में सक्रियता का परिणाम रहा। विधायक संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह आम तौर पर घर से सार्वजनिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में नहीं दिखतीं थीं। लेकिन अब हर जगह दिख रही हैं। इसे सिंह मैंशन के बैकअप प्लान के रूप में देखा जा रहा है। 14 जून को धनबाद में आरएसएस के अभ्यास वर्ग के समापन समारोह में रागिनी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। शनिवार को अपने ससुर दिवंगत सूरजदेव सिंह की 28 वीं पुण्यतिथि के मौके पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में भी रागिनी सक्रिय दिखीं। उन्होंने अतिथियों और भाजपा कार्यकर्ताओं की आगवानी की।

राजनीति प्रेक्षकों के अनुसार रागिनी ही अब सिंह मैंशन का चेहरा हैं। सूरजदेव सिंह की मृत्यु के बाद उनके अनुज बच्चा सिंह ने सिंह मैंशन की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया। उनके बाद सूरजदेव सिंह की पत्नी कुंती सिंह झरिया से भाजपा के टिकट पर दो बार चुनाव जीतीं। फिर कुंती पुत्र संजीव सिंह का नंबर आया। वे भाजपा के टिकट पर विधायक बने लेकिन नीरज हत्याकांड में फंसने के बाद उनकी राजनीतिक पारी समाप्ति की कगार पर है। ऐसे में संजीव अपनी पत्नी रागिनी को राजनीति में आगे बढ़ाने की रणनीति पर जेल के अंदर से काम कर रहे हैं।

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Posted By: mritunjay