जागरण संवाददाता, धनबाद: पुलिस मुख्यालय के उदासीन रवैये के कारण धनबाद समेत राज्य भर में पुलिस चालकों की प्रोन्‍नति पर ग्रहण लगा हुआ है। आलम यह है कि चालक पद पर बहाल हुए थे और आज भी साहब की ड्यूटी ही बजा रहे! बड़े पदों पर आसीन नौकरशाहों की नौकरशाही झेलनी पड़ रही सो अलग।

उपेक्षा का दंश झेल रहे इन कनीय पुलिसकर्मियों ने अपने हक के लिए गुहार लगाई है। राज्य के विभिन्‍न जिलों में पदस्थापित पुलिस चालकों की प्रोन्‍नति का मामला वर्षों से लंबित है। दर्जनों पुलिस चालक ऐसे हैं, जो पिछले एक दशक से अधिक समय से एक ही जिला इकाई में जमे हैं। तकरीबन चार वर्ष पूर्व आइजी (मानवाधिकार) नवीन कुमार सिंह की अध्यक्षता में केंद्रीय चयन पर्षद की बैठक हुई थी। बैठक की अध्यक्षता तत्कालीन आइजी (प्रशिक्षण) प्रिया दूबे, आइजी (प्रोविजन) अरुण कुमार सिंह और कार्मिक डीआइजी संगीता कुमारी ने की थी। उस दौरान पुलिस चालकों को हवलदार पद पर प्रोन्‍नत करने के लिए सामान्य कोटि की रिक्ति की समीक्षा हुई थी, जिसमें 348 में से 302 लोग योग्य पाए गए थे। वहीं 28 चालकों के मामले को हिंदी लिखने-पढ़ने की अक्षमता अप्राप्त संपत्ति विवरण, विभागीय कार्रवाई, फील्ड बोर्ड में अनुपस्थिति आदि के कारण लंबित रखा गया। 15 लोग आयोग्य पाए गए।

हालांकि इस पूरी प्रक्रिया के बावजूद इसमें शा‍मिल कई लोग सेवानिवृत्‍त हो चुके हैं, पर अब तक उन्हें प्रोन्नति नहीं मिली है। इस कारण सभी पुलिस चालक वर्षों से आर्थिक लाभ से वंचित हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि उपरोक्त तिथि के बोर्ड होने के बाद दोबारा फिर जैप के पुलिस चालकों के लिए बोर्ड गठित हुआ था, जिसमें तकरीबन पांच दर्जन से अधिक पुलिस चालकों को प्रोन्नित मिली। यहां तक कि‍ उनकी पोस्टिंग भी राज्य के विभिन्न जिलों में हो चुकी है। वह प्रोन्‍नति का लाभ भी उठा रहे हैं, पर चार साल पहले योग्‍य करार दिए गए 302 चालक अब भी आलाधिकारियों की ओर उम्‍मीद भरी नजरें टिकाए बैठे हैं। इन 302 पुलिस चालकों की प्रोन्नति पर बैठक पुलिस मुख्यालय में 7 नंवबर 2019 को ही हो चुकी है।

Edited By: Deepak Kumar Pandey