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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 19, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भोजपुरी, मगही, मैथिली संस्कृति बचाओ मंच के लोगों ने किया मुख्यमंत्री का पुतला दहन

By JagranEdited By:
Published: Sat, 19 Feb 2022 06:58 PM (IST)

भोजपुरी मगही मैथिली संस्कृति बचाओ मंच के लोगों ने शनिवार को डिगवाडीह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो ...और पढ़ें

भोजपुरी, मगही, मैथिली संस्कृति बचाओ मंच के लोगों ने किया मुख्यमंत्री का पुतला दहन
भोजपुरी, मगही, मैथिली संस्कृति बचाओ मंच के लोगों ने किया मुख्यमंत्री का पुतला दहन

जामाडोबा : भोजपुरी, मगही, मैथिली संस्कृति बचाओ मंच के लोगों ने शनिवार को डिगवाडीह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो, मंत्री आलमगीर आलम व प्रदेश झारखंड कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश ठाकुर का पुतला दहन किया। नेतृत्व जितेंद्र पासवान, अभिषेक सिंह बंटी, डब्लू राय, मनन यादव ने किया। सभी लोगों ने एक स्वर में कहा की झारखंड किसी की बपौती नहीं हैं। भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका भाषा के लोगों का भी झारखंड निर्माण में योगदान रहा है।

शिक्षा, नियोजन की नीति में धनबाद, बोकारो से हटाये गए भोजपुरी, मगही को पुन: लागू किया जाए। इस भाषा को बोलने वालों की संख्या काफी है। अगर हमारी भाषा को शामिल नहीं किया गया तो झारखंड सरकार की ईंट से ईंट बजा देंगे। धनबाद, बोकारो में आर्थिक नाकेबंदी आंदोलन करेंगे। मौके पर राजेंद्र गोंड, सूरज साव, दिलीप साव, पिटू राय, विनय गुप्ता, चंदन साव, चिटू पासवान, राजेश साहनी, राजेश सिंह, राकेश सिंह, साबिर आलम, जावेद अंसारी, शाहिद अंसारी, समीर अंसारी, औरंग•ोब खां आदि थे। मंच के संयोजक मदन राम ने कहा कि कांग्रेस के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर, विधायक दल के नेता आलमगीर आलम के दबाव में झारखंड के मुख्यमंत्री ने धनबाद, बोकारो से मगही, भोजपुरी भाषा को क्षेत्रीय भाषा से हटाने का काम किया है। मगही, भोजपुरी भाषी के लोग उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे। मंच का चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा। धनबाद, बोकारो से भोजपुरी, मगही भाषा को क्षेत्रीय सूची से हटाना स्वागत योग्य : मासस

बलियापुर : शनिवार को बलियापुर पहुंचे मासस के हलधर ने पत्रकारों के सामने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। इस दौरान उन्होंने धनबाद और बोकारो जिला से भोजपुरी व मगही भाषा को झारखंड सरकार की ओर से क्षेत्रीय भाषा की सूची से हटाए जाने के निर्णय का मासस के केंद्रीय महासचिव हलधर महतो ने स्वागत किया। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार व आंदोलनकारियों को बधाई दी है।