जागरण संवाददाता, धनबाद। कोल इंडिया की अनुषंगी इकाई बीसीसीएल में कुछ आउटसोर्सिग कंपनियां कोयले की लूट में शामिल हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए लोकसभा की पिटिशन कमेटी ने कोयला कंपनियों की कार्यशैली पर सवाल खड़ा किया है। साथ ही सीबीआई जांच की सिफारिश की है। अब कोयला मंत्रालय पिटिशन कमेटी की अनुशसा पर आगे कार्रवाई करेगी। इसकी जांच होती है तो कोयला कंपनियों के बड़े-बड़े अधिकारियों के फंसने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

महालक्ष्मी इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड को सालानापुर में सी एवं डी सीम में ओवर बर्डेन (ओबी), कोयला खनन एवं परिवहन का काम मिला था। कंपनी ने हाईपावर कमेटी से ज्यादा वेतन मजदूरों को देने संबंधी आदेश का हवाला देते हुए नुकसान की बात कह कर काम बंद कर दिया। बाद में उसी काम को रिटेंडर कर ज्यादा दर पर पुन: महालक्ष्मी को ही दे दिया गया। आरोप है कि इसमें नियमों की अनदेखी की गई है एवं आउटसोर्सिंग कंपनी के हित में बीसीसीएल अधिकारियों ने काम किया। इस मामले में काम से 6,91,40,783 रुपये ज्यादा भुगतान किया गया। इस मामले की शिकायत सुभाष सिंह ने की थी। इसकी जांच भगत सिंह कोश्यारी की अध्यक्षता में लोकसभा की पिटीशन कमेटी ने की। इस मामले में कमेटी ने आउटसोर्सिंग कंपनियों को काम से ज्यादा भुगतान एवं फोरक्लोजर की सीबीआई जाच की अनुशसा की है।

महालक्ष्मी को बीसीसीएल के सीवी एरिया के दामगोड़िया कोलियरी क्षेत्र में ओपेनकास्ट के लिए कार्य आदेश के अनुसार 47.40 लाख मीट्रिक टन कोयला खनन के लिए 1,45,86,80,000 की राशि का काम दिया गया था। कंपनी ने 12,55,222 मीट्रिक टन का ही उत्खनन और परिवहन किया था। इसी तरह मेसर्स सद्भाव अन्नपूर्णा (ज्वाइंट वेंचर) भी 21.5.2013 के मूल कार्य आदेश में निर्धारित पारामीटर और समय सारिणी तक का काम पूरा नहीं किया। सद्भाव अन्नपूर्णा के काम को दो बार संशोधित करने एवं काम से ज्यादा करोड़ों रुपये का अतिरिक्त भुगतान का भी आरोप है।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप