धनबाद [अरविंद ]। पासपोर्ट जांच प्रक्रिया में होने वाले पुलिस सत्यापन के फार्मेट का कुछ हिस्सा बदल दिया गया है। बदले हुए फार्मेट के अनुसार, पुलिस अन्य बिदुओं की जांच के साथ नागरिकता जांच पर अब विशेष बल देगी। इससे संबंधित प्रमाण पत्र भी मांगा जाएगा। अगर यह प्रमाण पत्र नहीं मिलता है तो फार्मेट में कारण सहित इसका उल्लेख पुलिस करेगी।

भारत सरकार के संयुक्त सचिव सह मुख्य पासपोर्ट अधिकारी ने पासपोर्ट सत्यापन के बाबज दिशा-निर्देश जारी किया है। इसके बाद जिलों में थानेदारों से कहा गया है कि नागरिकता संबंधित बिंदु पर गहराई से जांच की जाए। यह भी आदेश मिला है कि अगर जन्मस्थान वर्तमान पता से अलग है तो जन्म स्थान की जगह वर्तमान पते का सत्यापन करना है। पासपोर्ट जांच प्रक्रिया में लोगों को थाने का न चक्कर काटना पड़े।

आवेदकों को किसी भी सूरत में थाने पर नहीं बुलाया जाएगाः विदेशी शाखा (बोकारो जिला पुलिस) ने सभी थानों को वायरलेस संदेश के माध्यम से दिशा-निर्देश जारी किया है। कहा गया है कि जांच अधिकारी आवेदक के घर जाने के बाद आवेदकों से संबंधित पुलिस अधिकारी जरूरी कागजात की ही मांग करेंगे। ऐसे कागजात की मांग की जाए जिससे आसानी से आवेदकों का पासपोर्ट बन जाए। उन्होंने कहा था कि अनावश्यक कागजात मांगे जाने और थाने बुलाकर जांच प्रक्रिया पूरी करने से एक ओर पुलिस की छवि धूमिल हो रही है, वहीं दूसरी ओर लोगों में पुलिस की प्रति नाराजगी भी  देखी जा रही है। एसपी ने इसपर तुरंत रोक लगाने का आदेश देते हुए कहा था कि अवहेलना करने वालों पर कार्रवाई भी तय है।

अभी भी कुछ थानों में नहीं बदली व्यवस्था: सख्त आदेश के बाद भी कई थानों में व्यवस्था नहीं बदली है। पहले होता यह था कि  एसपी कार्यालय से आवेदकों के आवासीय थाने में कागजात भेजा जाता था। मुंशी कागजात में अंकित मोबाइल नंबर पर फोन कर आवेदकों को  बुलाते थे। आवेदकों से कागजात लेकर मुंशी-दारोगा जांच प्रक्रिया संबंधित कार्रवाई पूरी कराकर आवेदन को वापस एसपी कार्यालय के विदेशी  शाखा में भेज दे रहे थे। हालांकि इस दौरान कई ऐसे कागजात की मांग भी की जाती थी, जिसकी जरूरत पासपोर्ट बनाने के लिए होती ही नहीं थी। एसपी ने कहा कि अब ऐसा नहीं होगा। अधिकारी खुद आवेदकों के घर जाएंगे और जरूरी कागजात की ही मांग करेंगे। हालांकि आदेश के बावजूद कुछ थानों में आवेदकों को बुलाए जाने की शिकायतें मिल रही हैं।

सिटी थाना इलाके में है एम पासपोर्ट की सुविधा, ऐसा सिस्टम करता है काम: बोकारो में अपने कार्यकाल के दौरान एसपी वाईएस रमेश ने राज्य में पहली बार एम  पासपोर्ट की व्यवस्था बोकारो के सिटी थाने में शुरू की थी। इससे लंबी जांच प्रक्रिया सरल हो गई थी। पायलट प्रोजेक्ट के तहत पासपोर्ट कार्यालय से स्वीकृति लेकर सिटी थाने में यह व्यवस्था शुरू की गई थी। पासपोर्ट कार्यालय के साफ्टवेयर से लैस टैब सिटी थाने में उपलब्ध कराया गया। पासपोर्ट के लिए आवेदन देने वाले आवेदकों की जांच के लिए संबंधित कागजात सीधे पासपोर्ट कार्यालय से सिटी थाने में मौजूद टैब पर आता है। यहां से पुलिस अफसर टैब लेकर आवेदक के आवास पर जाते हैं। अक्षांश से लेकर देशांतर तक की जानकारी टैब के जरिए उपलब्ध करानी होती है। प्रक्रिया पूरी कर पदाधिकारी कागजात सीधे एसपी कार्यालय भेज देते हैं। यहां से आवेदन पासपोर्ट कार्यालय चला जाता है और शार्ट प्रक्रिया के तहत जांच पूरी कर पासपोर्ट मिल जाता है। दूसरे थानों में भी इसे शुरू करने की योजना थी, लेकिन वाईएस रमेश के तबादले के बाद यह अभियान शिथिल पड़ गया। अब वर्तमान एसपी ने इस अभियान को गति देने का आदेश दिया है। इस तकनीक की पुराने समय में राज्यभर में तारीफ भी हुई थी।

अन्य थाना इलाके में रहने वाले आवेदकों को झेलनी पड़ती है परेशानी: वहीं अन्य थाना क्षेत्र में रहनेवाले आवेदकों का आवेदन पासपोर्ट कार्यालय से एसपी कार्यालय आता है। यहां से कागजात थाने में भेजा जाता है। थाने से जांच प्रक्रिया पूरी कर कागजात फिर एसपी कार्यालय आता है और इसे अंतिम रूप देकर पासपोर्ट कार्यालय भेजा जाता है।

थाने में मौजूद सड़क सुरक्षा के टैब से ही हो सकता काम: जिले भर के थानों में एम पासपोर्ट की सुविधा बहाल करने के लिए टैब की कमी पहले आड़े आती थी। वर्तमान में परिवहन विभाग से संबंधित जिला सड़क सुरक्षा समिति ने सभी थानों में टैब उपलब्ध करवा दिया है। सड़क हादसों के बाद इस टैब के माध्यम से अनुसंधानकर्ता पूरा ब्योरा देते हैं। इसी टैब का प्रयोग एम पासपोर्ट की सुविधा के लिए भी किया जा सकता है। वर्तमान में इसे अंतिम रूप देने की कोशिश जारी है।

Posted By: Mritunjay

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