जागरण संवाददाता, धनबाद : आम तौर पर जनप्रतिनिधि यह आरोप लगाते रहते हैं कि सरकारी अधिकारी विकास कार्यो के प्रति गंभीर नहीं हैं। इस आरोप की सच्चाई को लेकर विवाद हो सकता है। लेकिन, एक बात सच है कि आरोप लगाने वाले खुद अपने क‌र्त्तव्य और उत्तरदायित्व को लेकर गंभीर नहीं हैं। एक साल बाद शनिवार को राज्य के राजस्व मंत्री अमर बाउरी की अध्यक्षता में जिला योजना समिति की बैठक हुई तो उसमें सभी अधिकारी तो मौजूद थे लेकिन जनप्रतिनिधि गायब। एक भी सांसद और विधायक ने जिला योजना समिति की बैठक में भाग लेना मुनासिब नहीं समझा। जबकि इस बैठक में ही जिले के विकास कार्यो का खाका तैयार होता है।

धनबाद जिले में दो सांसद हैं-पीएन सिंह और रवींद्र पांडेय। जबकि छह विधायक हैं-राज सिन्हा, फूलचंद मंडल, अरुप चटर्जी, राजकिशोर महतो, ढुलू महतो और संजीव सिंह। संजीव सिंह जेल में हैं। उनकी अनुपस्थिति स्वभाविक है। शेष सांसद-विधायकों की अनुपस्थिति अखरने वाली है। जनता ने जिन जनप्रतिनिधियों को चुना है उन्होंने अपने प्रतिनिधि चुन रखे हैं। जिलास्तर पर होने वाली ज्यादातर बैठकों में जनप्रतिनिधियों के प्रतिनिधि ही भाग लेते हैं। जिन्हें अधिकारी जनप्रतिनिधि की तरह भाव नहीं देते हैं। बैठक में मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल, उपायुक्त आंजनेयुलु दोड्डे, जिला परिषद अध्यक्ष रोबिन गोराई, चिरकुंडा के नगर परिषद अध्यक्ष डबलू बाउरी आदि उपस्थित थे।

375 योजनाओं का अनुमोदन: 375 योजनाओं का कुल अनुमोदित-प्राक्कलित राशि 4785.28 लाख का प्रस्ताव पारित किया गया। जिला योजना अनाबद्ध निधि के तहत अनुशंसित व जिला कार्यकारणी द्वारा चिह्नित 36 योजनाओं को स्वीकृति दी गई। जिला योजना अनाबद्ध निधि के तहत वित्तीय वर्ष 2017-18 में अनुमोदित अकार्यान्वित कुल 130 योजनाओं की कुल लागत राशि 13.72.90 लाख का पुन: अनुमोदन किया गया। बैठक में मंत्री ने कहा कि जिन योजनाओं में किसी भी मद से आवंटन प्राप्त नहीं है उन्हें अनाबद्ध निधि के तहत लिया जाएगा।

इंदिरा आवासों की नहीं होगी मरम्मत: मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल ने नगर निगम क्षेत्र में पूर्व से बने इंदिरा आवासों की मरम्मत का मुद्दा उठाया। कहा कि पूर्व से बने इंदिरा आवास रहने योग्य नहीं हैं, निगम में मरम्मत का प्रावधान हो। इस पर मंत्री ने कहा कि एक व्यक्ति को एक बार एक घर का प्रावधान है। मरम्मत का प्रावधान नहीं है। यह कैबिनेट स्तर का मामला है। वहां रखा जाएगा।

रिपेयर के बाद ही हैंडओवर होगा पीएचसी: झरिया विधायक संजीव सिंह के प्रतिनिधि अखिलेश सिंह ने झरिया में जर्जर पीएचसी का मामला उठाया। उसे शुरू करने की मांग की। इस पर उपायुक्त ने कहा कि भवन जर्जर हो चुका है और उसमें खिड़की-दरवाजे भी नहीं हैं लिहाजा उसे विभाग लेने को तैयार नहीं। मरम्मत के बाद हैंड ओवर कर दिया जाएगा।

नहीं हटेगा रोड डिवाइडर: सांसद पीएन सिंह के प्रतिनिधि अजय तिवारी ने शहर में गांधी चौक से सिंफर परिसर तक रोड डिवाइडर पूरी तरह पैक कर देने पर विरोध जताया व बीच में कुछ जगह इसे खाली छोड़ने की मांग की जिसे उपायुक्त ने सिरे से खारिज कर दिया। बताया कि ट्रैफिक सुचारू रखने को यह जरूरी है।

अनाबद्ध योजना से नाला बनाने का रखें प्रस्ताव: पार्षद प्रियरंजन ने सेंट्रल हॉस्पिटल, जगजीवन नगर, पुलिस लाइन होते हुए 10 फीट गहरे कच्चे नाले के पक्कीकरण का मुद्दा उठाया। बताया कि इसकी वजह से बारिश में घरों में गंदा पानी घुस जाता है। मंत्री ने इसे अनाबद्ध योजना के तहत बनवाने को मेयर से प्रस्ताव भेजने को कहा।

Posted By: Jagran

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