धनबाद, जेएनएन। परीक्षा में अब किताब खोलकर लिखेंगे। इसे कदाचार की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। केवल इतना ही नहीं, छात्र-छात्राएं चाहें तो परीक्षा हॉल में अपने नोट्स भी ले जा सकते हैं। रट्टा मार याद करने की प्रवृति को खत्म करने के लिए आइआइटी आइएसएम प्रबंधन ने परीक्षा नीति में सुधार किया है। संस्थान के ओपन बुक एग्जामिनेशन सिस्टम लागू करने के निर्णय से छात्रों की बल्ले-बल्ले हो गई है।

संस्थान में पहली बार परीक्षा में अपने साथ किताब और नोट्स खोलने की अनुमति होगी। इस संबंध में संस्थान ने नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। उसकी प्रति संबंधित विभागों व अधिकारियों को भेज दी गई है। सीनेट की बैठक में ओपन बुक एग्जामिनेशन की स्वीकृति मिल चुकी है। यह परीक्षा पूरी तरह संबंधित अध्यापक के विवेक के आधार पर होगी। अध्यापक अपनी इच्छा अनुसार परीक्षा में किताब व नोट्स की अनुमति दे सकते हें या फिर इसकी अनुमति नहीं भी दे सकते हैं। यह भी स्पष्ट किया गया है कि ओपन बुक एग्जामिनेशन के लिए परीक्षा की अवधि में कोई परिवर्तन नहीं होगा।

  • डिजिटल उपकरणों पर होगी पाबंदी

ओपन बुक एग्जामिनेशन में किताब और नोट्स ले जाने की अनुमति जरूर होगी लेकिन अनय परीक्षाओं की तरह लैपटॉप, मोबाइल फोन प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर और ऐसे ही डिजिटल उपकरण के साथ परीक्षा हॉल में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।

  • एक्टिविटी की बढ़ाई जाएगी संख्या

ओपन बुक से परीक्षा देने का मकसद रट्टा लगाकर परीक्षा पास करने की प्रवृति पर रोक लगाना है। इससे छात्र में समझने की आदत को बढ़ेगा। वहीं छात्रों को अपना कौशल परखने में मदद मिलेगी। इससे उनकी नॉलेज भी बढ़ाई जाएगी। वहीं समस्या का समाधान खोजना, रचनात्मकता, ग्रुप एक्टिविटी, टीम वर्क, सेमिनार, क्विज आदि भी छात्रों के मूल्यांकन प्रणाली के आधार होंगे।

Posted By: Mritunjay

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