धनबाद, जेएनएन। मुर्गे की कीमत फिर आसमान पर पहुंच गई है। बाजार में यह 160 रुपये किलो के भाव बिक रहा है। हालांकि अभी भी यह चुनिंदा दुकानों में ही उपलब्ध है। बावजूद इसके मांग से काफी कम आपूर्ति हो पा रही है। लॉकडाउन-2 के आखिरी दिनों में कुछ मुर्गे की दुकानें खोली गई थी। तब इसकी कीमत 160-180 रुपये किलो (गोटा) थी। बाद में बंगाल सीमा खुलने और मुर्गे की आवक शुरू होने के बाद कीमत 130 रुपये किलो तक आ गई थी।

मुर्गे के आपूर्तिकर्ताओं की मानें तो धनबाद में मुख्यत: बंगाल से मुर्गे की आवक होती है। लॉकडाउन शुरू होने से महीने भर पहले ही लोगों ने कोरोना वायरस के खतरे के मद्देनजर मुर्गा खाना लगभग बंद कर दिया था। लिहाजा तीन माह की बंदी के कारण यह उद्योग लगभग बर्बाद हो चुका है। कारोबारी नए सिरे से शुरुआत कर रहे है। ऐसे में मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पा रही।

आपूर्तिकर्ता बिंटू लाला ने बताया कि आपूर्ति करने में कई जगह जांच से होकर गुजरने में भी परेशानी होती है। यहां सिर्फ लाइसेंसी दुकानें ही खोलने की इजाजत है। लिहाजा अभी इस कारोबार को पूर्व की स्थिति तक पहुंचने में छ: माह तक का समय लग सकता है। फिलहाल फार्म से थोक विक्रेताओं को ही 140 रुपये किलो के भाव मुर्गा मिल रहा है। लिहाजा बाजार में यह 160-170 रुपये किलो मिल रहा है। प्रमुख आपूर्तिकर्ता बिंटू के मुताबिक, बाजार का 20 फीसद ही इस वक्त सप्लाई किया जा रहा है।

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