धनबाद, जेएनएन। दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट की घटना ने देशभर में अधिवक्ताओं और पुलिसकर्मियों की छवि को धूमिल किया है। मामले में दोनों ही पक्षों से गलती हुई है। ताली कभी एक हाथ से नहीं बजती। कहना था वरीय अधिवक्ता व धनबाद बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष कंसारी मंडल का। वे सोमवार को दैनिक जागरण कार्यालय में जागरण विमर्श को संबोधित कर रहे थे।

मंडल ने कहा कि इस समस्या का समाधान बातचीत से ही हल किया जा सकता है। यदि दोनों पक्ष अड़े रहे तो मामला काफी तूल पकड़ेगा। अभी सिर्फ दिल्ली के अधिवक्ता आंदोलनरत हैं आगे देशभर के अधिवक्ता इसमें शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों के पास आर्म्स होता है। उसका उपयोग कहां किया जाना चाहिए इसका भी नियम बना हुआ है। फायरिंग कर पुलिस अधिकारियों ने बहुत बड़ी गलती की है। वह भी अधिवक्ता के सीने में गोली मारी जो अपराध है। अधिवक्ताओं ने अपनी विद्वता खोते हुए मारपीट भी की तो हाथ से थप्पड़ ही मारा। पुलिसकर्मी भी हाथ ही चलाते तो बात और थी लेकिन उन्होंने फायरिंग कर इसे आपराधिक घटना बना दिया है।

इस मामले में उन्होंने पुलिस विभाग द्वारा भेदभाव की बात भी कही। मंडल ने कहा कि पुलिस ने अपनी एफआइआर तो दर्ज कर ली लेकिन अधिवक्ताओं की शिकायत पर प्राथमिकी नहीं की गई है। पुलिस ऐसा पहले भी करती रही है। धनबाद में भी कई ऐसी घटनाएं घट चुकी हैं जहां पुलिस ने मनमानी की है।

Posted By: Mritunjay

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