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मॉडल होमगार्ड विधेयक में संशोधन की तैयारी, राज्यों से सुझाव आमंत्रित; शामिल हो पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ

Published: Tue, 25 Aug 2026 12:58 PM (IST)

केंद्र सरकार मॉडल होमगार्ड विधेयक में संशोधन की तैयारी कर रही है और सभी राज्य सरकारों से सुझाव मांगे हैं। ...और पढ़ें

मॉडल होमगार्ड विधेयक में होगा संशोधन, मांगे गए सुझाव।

मॉडल होमगार्ड विधेयक में होगा संशोधन, मांगे गए सुझाव।

HighLights

  1. मॉडल होमगार्ड विधेयक में संशोधन की तैयारी, केंद्र ने मांगे सुझाव।

  2. पूरे साल ड्यूटी, पेंशन, सेवानिवृत्ति लाभ देने की मांग।

  3. झारखंड एसोसिएशन ने राज्यों से राय लेने की अपील की।

जागरण संवाददाता, धनबाद। होमगार्ड अधिनियम, 1965 के तहत लागू मॉडल होमगार्ड विधेयक में संशोधन की तैयारी चल रही है। केंद्र सरकार के स्तर पर प्रस्तावित संशोधन में होमगार्ड जवानों की वर्तमान जरूरतों को प्राथमिकता देने की कवायद की जा रही है। इसे लेकर सभी राज्य सरकारों के सचिवों को पत्र भेजकर सुझाव मांगे गए हैं।

पत्र में बताया गया है कि केंद्रीय होमगार्ड संगठन की ओर से आयोजित अखिल भारतीय होमगार्ड महानिदेशक एवं कमांडेंट सम्मेलन में मॉडल होमगार्ड विधेयक पर विस्तार से चर्चा हुई थी। इसी चर्चा के बाद विधेयक में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

इसका उद्देश्य विधेयक के प्रभावी क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों का समाधान करना है। केंद्र ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों से किसी प्रावधान पर आपत्ति होने की स्थिति में उसकी जानकारी भी उपलब्ध कराने को कहा है।

पुलिसकर्मियों की तरह मिले सुविधाएं

मॉडल होमगार्ड विधेयक में संशोधन को लेकर झारखंड होमगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष रवि मुखर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार की पहल स्वागत योग्य है, लेकिन नियम दिल्ली की तर्ज पर लागू नहीं किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में होमगार्ड जवानों की सेवा केवल चार वर्ष के लिए ली जाती है। इसके बाद नवनामांकन की तरह पूरी प्रक्रिया दोबारा अपनाई जाती है।

उन्होंने मांग की कि होमगार्ड जवानों से 60 वर्ष की आयु तक सेवा ली जाए। पुलिसकर्मियों की तरह उन्हें पेंशन, सेवानिवृत्ति लाभ समेत अन्य सुविधाएं दी जाएं। साथ ही सभी जवानों को पूरे साल ड्यूटी उपलब्ध कराई जाए।

मुखर्जी ने कहा कि संशोधन को अंतिम रूप देने से पहले केंद्र सरकार को प्रत्येक राज्य के होमगार्ड एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनकी राय भी लेनी चाहिए। राज्यों की जरूरत और जवानों की समस्याओं को शामिल करने के बाद ही संशोधित विधेयक को लागू किया जाना चाहिए।