धनबाद, जागरण संवाददाता: किशोरावस्था में एनीमिया की कमी एक गंभीर समस्या है। देश में लगभग 30 प्रतिशत किशोरों में एनीमिया की शिकायत है। जबकि किशोरियों में यह शिकायत 55 प्रतिशत से ज्यादा है। दरअसल पौष्टिक आहार नहीं लेने और विभिन्न प्रकार के मानसिक अस्थिरता, किशोरावस्था में होने वाली विभिन्न परेशानियों की वजह से किशोरियां ज्यादा प्रभावित होती हैं। यह बातें राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बुधवार को स्वास्थ्य विभाग के युवा मैत्री केंद्र की ओर से मिल्लत हाई स्कूल वासेपुर में काउंसलर रानी प्रसाद ने कहीं।

मोबाइल की लत से बनाएं दूरी

काउंसलर ने बताया कि किशोरों में मोबाइल के प्रति काफी क्रेज देखा जा रहा है लेकिन इससे दूरी बनाने की जरूरत है। पढ़ने-लिखने में मोबाइल का सीमित उपयोग किया जा सकता है लेकिन इसका अधिक उपयोग खतरनाक साबित हो सकता बै। मोबाइल का ज्यादा उपयोग करने वाले बच्चों में देखा जा रहा है कि बच्चे ऑनलाइन गेम अथवा दूसरी ओर मुड़ जा रहे हैं। यहीं से मानसिक परेशानी शुरू होती है। किशोरों में अधिकांश मामले देखने को मिल रहे हैं।

अस्पताल में लें निशुल्क परामर्श

उन्होंने कहा कि ऐसे किशोरों के लिए सदर अस्पताल के युवा मैत्री केंद्र में निशुल्क परामर्श दिए जा रहे हैं। राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत पोषण, चोटों और हिंसा, गैर-संचारी रोग, मानसिक स्वास्थ्य और मादक द्रव्यों के सेवन को शामिल किया गया है।

सभी प्रखंडों में दिए जा रहे निशुल्क परामर्श

उन्होंने बताया कि सदर अस्पताल के युवा मेट्रिक केंद्र में किशोर-किशोरियों को विशेष परामर्श सुविधाएं दी जा रही हैं। हर महीने 600 से ज्यादा किशोर-किशोरिया परामर्श प्राप्त कर रही हैं। इसके अलावा धनबाद के सभी प्रखंडों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में निशुल्क परामर्श की व्यवस्था की गई है। यहां भी जाकर इसका लाभ लिया जा सकता है।

Edited By: Mohit Tripathi

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