जागरण संवाददाता, धनबाद: ट्रांसजेंडर की स्थिति में सुधार के चल रहे उपायों को गति देने एवं बेहतर कार्य का वातावरण प्रदान के लिए आइआइटी आइएसएम ने नया कदम उठाया है। आइआइटी के मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग की प्रोफेसर रजनी सिंह ने कोलकाता में ट्रांसजेंडर पर किए अपने शोध के माध्यम से कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इस कदम का उद्देश्य बड़े पैमाने पर समाज में ट्रांसजेंडर समुदाय की स्थिति में सुधार के लिए चल रहे उपायों को गति देना और उन्हें बेहतर कार्य का वातावरण प्रदान करना है।

प्रोफेसर सिंह ने अपने शोध ट्रांसजेंडर समावेशिता पर रियलिटी चेक कर कई सिफारिशें दी हैं। इन्हें आगे केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय की ओर से कार्यान्वयन के लिए अनुशंसित किया गया है। इनमें कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न नीतियां बनाना और ट्रांसजेंडर अधिकारों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने के साथ कार्यक्रम आयोजित करना शामिल है। प्रो रजनी ने यह भी सुझाव दिया है कि कार्यस्थल पर जेंडर सेंसटाइजेशन सेल (लिंग संवेदीकरण प्रकोष्ठ) को समय-समय पर सलाह जारी की जानी चाहिए, ताकि वे निष्क्रिय होने के बजाय ट्रांसजेंडर अधिकारों की रक्षा करने में प्रभावी ढंग से काम करें।

[शोध के दौरान ट्रांसजेडर के साथ प्रोफेसर रजनी।]

आइआइटी आइएसएम की इन सिफारिशों को लागू करने के लिए श्रम और रोजगार मंत्रालय के मुख्य श्रम आयुक्त राहुल त्यागी ने श्रम और रोजगार मंत्रालय के सभी क्षेत्रीय प्रमुखों को पत्र भेजकर निर्देश जारी किया है। मंत्रालय ने पत्र में लिखा है कि ट्रांसजेंडर लिंग डिस्फोरिया से पीड़ित हैं और देश में हाशिए पर रहने वाले समुदाय के रूप में बने हुए हैं। इसलिए समग्र रूप से समाज में उनकी स्थिति में सुधार करने के लिए और बेहतर कामकाजी माहौल प्रदान करने के लिए कुछ सिफारिशें लागू की जा रही हैं।

मानवाधिकार‍ आयोग की ओर से दिया गया था शोध प्रोजेक्‍ट

प्रोफेसर रजनी सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से आइआइटी आइएसएम को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की सामाजिक स्थिति को उजागर करने पर केंद्रित करते हुए शोध प्रोजेक्ट दिया गया था। विशेष रूप से कोलकाता में रहने वाले ट्रांसजेंडर पर अध्ययन किया। इनके सामने आने वाली समस्याएं, सुविधाएं और समाधान पर गहन रिसर्च किया। कानूनी और सामाजिक उपायों के माध्यम से ट्रांसजेंडर व्यक्तियों में विश्वास पैदा करने की आवश्यकता है।

Edited By: Deepak Kumar Pandey