साहिबगंज, जेएनएन। साहिबगंज जिले के सपूत सीआरपीएफ जवान कुलदीप उरांव जम्मू-कश्मीर के मालबाग क्षेत्र में आतंकवादियों के सामने डटे रहे और मुकाबला किया। दोनों तरफ से चली गोली में कुलदीप देश की सेवा करते हुए वीरगती को प्राप्त हुए। उनका पार्थिव शरीर शनिवार सुबह 9: 30 बजे भारतीय वायु सेना के हेलिकॉप्टर से साहिबगंज स्थित जैप-9 ग्राउंड में लाया गया। इसके बाद सीआरपीएफ के जवानों ने शहीद को सलामी दी। इस दौरान उपायुक्त वरुण रंजन,पुलिस अधीक्षक अनुरंजन किस्पोट्टा, डीआईजी नरेंद्र कुमार सिंह, राजमहल विधायक अनंत ओझा से लेकर जिले तमाम बड़े अधिकारियों ने उन्हें अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

शहीद कुलदीप उरांव साहिबगंज जिले के आजादनगर,जिरवाबड़ी वार्ड नं 12 के रहने वाले थे। कुलदीप सीआरपीएफ की क्विक एक्शन टीम के सदस्य थे जो फ़िलहाल श्रीनगर में पोस्टेड थे। कुलदीप का पार्थिव शरीर शुक्रवार की रात रांची पहुंचा था जहां राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इन्हें श्रद्धांजलि दी थी।

 

 

गुरुवार की रात श्रीनगर में आतंकियों के साथ सीआरपीएफ जवानों की मुठभेड़ हुई, जिसमें आजादनगर के कुलदीप उरांव की जान चली गई। कुलदीप साहिबगंज नगर पार्षद घनश्याम उरांव के पुत्र थे। घनश्याम भी सीआरपीएफ में हेड कांस्टेबल के पद से सेवानिवृत हुए हैं। उसके बाद वार्ड नंबर 28 से पार्षद चुने गए। कुलदीप की पत्नी वंदना उरांव पश्चिम बंगाल पुलिस में सिपाही के पद पर कार्यरत हैं और अभी 24 परगना जिले में पदस्थापित हैं। 51 दिन के भीतर साहिबगंज के तीसरे लाल ने देश के लिए बलिदान दिया है। कुलदीप का पार्थिव शरीर शनिवार को साहिबगंज आएगा। राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। पुत्र की शहादत पर पिता को गम से अधिक गर्व है। उन्होंने कहा- बेटे ने फर्ज पूरा किया।

 

गुरुवार की आधी रात श्रीनगर से सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट ने वंदना को दूरभाष पर सूचना दी कि उनके पति आतंकियों के साथ संघर्ष में गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। कुछ देर बाद सीआरपीएफ कमांडेंट ने पिता को संदेश दिया कि उनका बेटा शहीद हो गया। श्रीनगर के मलबाग में मुठभेड़ हुई थी। घनश्याम के दो पुत्र हैं। कुलदीप छोटा था। बड़े भाई प्रदीप कुमार उरांव बाल श्रमिक विद्यालय में शिक्षक हैं। कुलदीप के दो बच्चे हैं। बेटा यश उरांव नौ साल का तो बेटी सिर्फ पांच साल की है। शुक्रवार की शाम वंदना भी यहां आ गईं।

 

ढांढस बंधाने आते रहे लोग

शहीद के परिजनों को ढांढस बंधाने के लिए लोगों का तांता लगा रहा। नगर परिषद अध्यक्ष श्रीनिवास यादव, उपाध्यक्ष रामानंद साह समेत कई वार्ड पार्षदों ने आकर परिजनों को सांत्वना दी।

सिंदरी से सेवानिवृत्त हुए थे घनश्याम

घनश्याम वर्ष 2007 में सीआरपीएफ से सेवानिवृत्त हुए थे। उस समय सिंदरी में थे। तीन साल पहले कुलदीप की माता का निधन हो गया था।

51 दिनों के अंदर साहिबगंज के तीन जांबाज देश पर हुए कुर्बान

51 दिनों के अंदर साहिबगंज के तीन जांबाजों ने देश के लिए अपनी जान दे दी। 11 मई को महादेवगंज के मुन्ना यादव माओवादियों के साथ मुठभेड़ में मारे गए थे। वहीं 16 जून को लद्दाख में चीनी सैनिकों के साथ संघर्ष में डिहारी गांव के कुंदन कुमार ओझा की जान चली गई थी।

11 मई :  महादेवगंज के रहने वाले मुन्ना यादव सीआरपीएफ की 170 वीं बटालियन में थे। यह बटालियन छत्तीसगढ़ में थी। बीजापुर में माओवादियों के साथ संघर्ष हुआ, जिसमें मुन्ना शहीद हो गए। 12 मई को हेलीकॉप्टर से उनका शव लाया गया। लॉकडाउन के बावजूद हजारों लोगों ने अंतिम यात्रा में भाग लिया। अंतिम संस्कार मुक्तिधाम में हुआ।

16 जून : लद्दाख की गलवन घाटी के चीनी सेना से मुकाबला करते हुए सदर प्रखंड के डिहारी गांव के कुंदन कुमार ओझा शहीद हो गए थे। कुंदन भारतीय सेना के दानापुर रेजीमेंट के जवान थे। वर्ष 2010 में उनकी बहाली हुई थी। शहादत से 15 दिन पहले उनकी बेटी हुई थी। बेटी को देखने का अरमान अधूरा रह गया। उनके अंतिम संस्कार में भी हजारों लोग जुटे थे। मुनीलाल घाट में अंतिम संस्कार किया गया था।

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