धनबाद, तापस बनर्जी। धनबाद रेलवे स्‍टेशन पर पूर्वाह्न 11.15 बजे लगातार उद्घोषणा की जाती है कि प्लेटफार्म नंबर तीन से कुसुंडा जानेवाली मेमू ट्रेन रवाना हो रही है। जिन्हें इस ट्रेन से सफर करना है वे प्लेटफार्म नंबर तीन पर चले जाएं। इस घोषणा पर कोई हलचल नहीं होती, क्‍योंकि धनबाद में इस ट्रेन के लिए एक भी यात्री नहीं रहते। नियत समय 11.30 बजे ट्रेन रवाना हो जाती है। हर डिब्बा खाली। बिना यात्री के ही यह ट्रेन अपने गंतत्‍व तक पहुंच जाती है। यह नजारा धनबाद स्टेशन पर रोज दिखता है। यह ट्रेन आने और जाने के दो फेरों में सात किलोमीटर की ही यात्रा करती है। इस ट्रेन की आमदनी महज 40 रुपये रोज। इस ट्रेन के एक फेरे में औसतन चार टिकट ही बिकते हैं। अब जानिए ऐसा क्यों हो रहा है। देश की कोयला राजधानी धनबाद। यहां जमीन के नीचे आग दहक रही है। यही कारण है कि धनबाद से चंद्रपुरा जानेवाले रेल मार्ग पर 15 जून से ही करीब 21 यात्री गाडिय़ों का परिचालन रोक दिया गया। इस फैसले से पूरा कोयलांचल हिल गया। हजारों लोगों की लाइफ लाइन बनी इस रेल लाइन पर यात्री गाडिय़ों का परिचालन क्या रुका कि आंदोलन की ज्वाला धधक गई। 

 

रेलवे को लगा चूना तो चला दी ट्रेन 

इस रेल लाइन पर कई गाडिय़ों का परिचालन बंद होने के साथ कोयला ढुलाई भी रुक गई। मालगाडिय़ों के परिचालन से रेलवे को राजस्व का काफी फायदा होता था। ऐसे में रेलवे ने कुसुंडा से मालगाड़ी चलाने का निर्णय लिया। पर, इस निर्णय से जनता भड़क सकती थी। क्योंकि लोगों का अल्टीमेटम था कि मालगाड़ी तभी चलेगी जब सवारी गाड़ी चले। ऐसे में ऊंट के मुंह में जीरा की तर्ज पर साढ़े तीन किलोमीटर की यात्रा वाली इस ट्रेन को चलाने का फैसला लिया गया। दस नवंबर को इस ट्रेन का विधिवत हरी झंडी दिखाकर परिचालन शुरू किया गया। 

 

यादगार यात्रा के लिए करते हैं सफर 

इस ट्रेन में जो इक्का-दुक्का लोग सफर करते हैं, वे यात्रा को यादगार बनाने के लिए ही चढ़ते हैं। इस ट्रेन में यात्रा कर रहे भगवान साहू ने मंगलवार को बताया कि हम तो महज यादगार यात्रा के लिए सफर कर रहे हैं। मन में रोमांच उठता है कि उस ट्रेन में सफर कर रहे है जो बंद हो गई रेल लाइन पर दौड़ रही है। उन्होंने यात्रा के दौरान कई सेल्फी भी लीं।   

 

तामझाम के साथ हुई थी शुरुआत 

धनबाद-चंद्रपुरा रेलवे लाइन बंद होने के तकरीबन पांच महीने बाद धनबाद-कुसुंडा के बीच काफी तामझाम के साथ मेमू का परिचालन शुरू हुआ था। पहले दिन स्थानीय विधायक राज सिन्हा, फूलचंद मंडल और मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल ने रेलवे अधिकारियों के साथ मिलकर हरी झंडी दिखाई थी। उस दिन जनप्रतिनिधियों ने धनबाद से कुसुंडा के बीच सफर का लुत्फ भी उठाया। उनके साथ दो दर्जन से अधिक समर्थक भी सफर पर थे। उस दिन कुल 31 टिकट जारी हुए थे। तब उम्मीद थी कि आनेवाले समय में लोगों की संख्या बढ़ेगी। पर, ट्रेन सेवा शुरू होने के अगले दिन से टिकटों का आंकड़ा 10 के  पार नहीं हुआ।

 

 

फैक्ट फाइल 

- धनबाद से कुसुंडा तक का किराया 10 रुपये। 

- प्रतिदिन 40 रुपये की आमदनी। 

- कुसुंडा टिकट घर संचालक भी कम आमदनी से चिंतित। 

- साढ़े तीन किमी की दूरी तय करने में हजारों का खर्च। 

- मेमू को 31 दिसंबर तक परिचालन की मिली अनुमति। 

 

इसी लाइन पर सालाना लाखों यात्री करते थे सफर 

डीसी लाइन यानी धनबाद चंद्रपुरा रेललाइन पर सालाना तकरीबन लाखों यात्री सफर करते थे। 15 जून से बंद हुए इस रेलखंड पर देश के विभिन्न हिस्सों के लिए लगभग दो दर्जन ट्रेनें थीं। इनमें रांची-हावड़ा शताब्दी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियर ट्रेन भी शामिल थी। इनमें कई ट्रेनें अब भी पटरी से दूर हैं जबकि ज्यादातर ट्रेनों के मार्ग बदल चुके हैं। इस समस्या का तत्कालीन हल ढूंढऩे के लिए ही रेलवे ने धनबाद से कुसुंडा के बीच मेमू का परिचालन शुरू किया। रेलवे की सोच थी कि इससे डीसी लाइन के यात्रियों को कुछ दूर तक के सफर का विकल्प मिल जाएगा पर यात्रियों ने इससे मुंह फेर लिया। क्योंकि उनकी समस्या इस छोटे से रेलमार्ग पर हो रहे परिचालन से दूर नहीं हो रही थी। 

 

समय सारिणी

03305 धनबाद-कुसुंडा 

धनबाद - दिन 11.30 बजे 

कुसुंडा - दिन 11.50 बजे 

03306 कुसुंडा-धनबाद 

कुसुंडा - दोपहर 12.05 

धनबाद - दोपहर 12.25 

 

यात्रियों की मांग पर प्रस्ताव भेजा गया था। रेलवे बोर्ड की स्वीकृति के बाद परिचालन शुरू हुआ। यात्री कम मिलने संबंधी फीडबैक लिया जा रहा है। 

आशीष कुमार झा, डीसीएम 

 

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Posted By: Babita Kashyap

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