कालीचरण मंडल, तालझारी (साहिबगंज)। भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच वर्ष 1999 में कारगिल में 60 दिनों तक चले युद्ध में तालझारी प्रखंड के एक छोटे से गांव प्रधान टोला के वीर सपूत जोनाथन मरांडी ने वीरता का लोहा मनवाया था। युद्ध में दुश्मन पाकिस्तानी सेना के छक्के छुड़ाए थे। देश की सेवा के लिए उन्होंने बलिदान दिया। कारगिल युद्ध में शहीद हुए तालझारी के इस वीर सपूत की शहादत पर उनकी पत्नी रूथ टुडू समेत पूरे देश को गर्व है। स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त कर्मी रूथ टुडू कहती हैं कि कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना ने लैंडमाइन बिछा दी थी। इसमें अपने साथियों के साथ जोनाथन भी जख्मी हो गए थे।

इलाज के दाैरान जोनाथन की हुई थी मृत्यु

पाकिस्तानी सैनिकों से लोहा लेते हुए जोनाथन घायल हो गए थे। इलाज के दौरान 31 जुलाई 2000 को उनकी जान चली गई। पेंशन के पैसों से परिवार का भरण-पोषण होता है। घर में इकलौती बेटी और दामाद देखभाल करते हैं। पति ने कारगिल युद्ध में बहादुरी दिखा प्रदेश व गांव का नाम रोशन किया। वे पाकिस्तानी सैनिकों से लड़ते हुए शहीद हुए थे। उनकी शहादत पर हम सभी को गर्व है।

बिहार रेजीमेंट के जवान थे जोनाथन

मालूम हो कि तालझारी के प्रधान टोला गांव में 4 मार्च 1966 को जोनाथन मरांडी का जन्म हुआ। प्राथमिक शिक्षा गांव के ही मिशन स्कूल में से हुई। बीएसके कालेज बरहड़वा में उच्च शिक्षा ली। देश सेवा की बचपन से तमन्ना थी सो 1986 में बिहार रेजीमेंट में चयन हुआ। हर वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस पर उनको पूरा साहिबगंज याद करता है। उनकी याद में प्रशासन ने तालझारी थाना के समीप स्मारक भी बनाया गया है, इसे कारगिल शहीद चौक के नाम से जाना जाता है। पत्नी रूथ को गणतंत्र एवं स्वतंत्रता दिवस पर प्रखंड प्रशासन की ओर से सम्मानित किया जाता है। वह पहले ए ग्रेड स्टाफ नर्स थीं, जो सेवानिवृत्त हो चुकी है। वे कहती हैं कि तत्कालीन उपायुक्त ने उन्हें आश्वस्त किया था कि बेटी को पिता के बदले नौकरी मिलेगी, मगर इस पर कोई सार्थक पहल नहीं हुई।

Edited By: Mritunjay