'मृत होमगार्ड जवानों के आश्रितों को जल्द मिले नौकरी', लोक सेवक संघ ने CM हेमंत सोरेन से की मांग
झारखंड गृहरक्षा वाहिनी में राज्य गठन के बाद ड्यूटी के दौरान कई जवानों की मौत हो गई। उनके आश्रितों को अभी तक नौकरी नहीं मिली है। लोक सेवक संघ ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की है कि इन मृत जवानों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी जाए। राज्य में ऐसे 77 मामले लंबित हैं, जिससे कई परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

मृत होमगार्ड जवानों के आश्रितों को जल्द मिले नौकरी
जागरण संवाददाता, धनबाद। राज्य गठन के बाद से झारखंड गृहरक्षा वाहिनी में काफी जवानों की मौत कार्य के दौरान हो गई। अब तक इनके आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी नहीं मिली है।
गृहरक्षा वाहिनी लोक सेवक संघ झारखंड ने मृत जवानों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की मांग की है। संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष रिंकेश कुमार यादव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र देकर उपरोक्त मामले पर गंभीरता पूर्वक विचार करने का आग्रह किया है।
सीएम सोरेन को लिखा पत्र
यादव ने अपने पत्र के माध्यम से बताया है कि 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य का गठन हुआ था। इसके बाद अक्टूबर 2014 में नियमावली बनी। इस बीच जिन होमगार्ड जवानों का कार्य के दौरान निधन हुआ उनके परिवार को कोई लाभ नहीं मिला है।
राज्य भर में ऐसे 77 मामले हैं। फिलहाल इन मृत गृहरक्षकों के आश्रितों के नामांकन का मामला लंबित है। यह परिवार आर्थिक संकट झेल रहा है।
इन परिवारों को इस स्थिति से निकालने के लिए जरूरी है कि इनके आश्रितों का नामांकन लेते हुए इन्हें गृहरक्षा वाहिनी में बहाल किया जाए।

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