संवाददाता, पंचेत। बीसीसीएल की दहीबाड़ी परियोजना में झामुमो और एमसीसी के बीच हिंसक झड़प के बाद धनबाद के निरसा विधानसभा क्षेत्र की राजनीति गरमा गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य अशोक मंडल ने निरसा के पूर्व विधायक अरुप चटर्जी को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा है कि मार्क्सवादी समन्वय समिति ( MCC) निरसा को धनबाद जैसा आउटसोर्सिंग कंपनियों में रंगदारी और खून-खराबा का अखाड़ा बनाना चाहती है। झामुमो किसी भी कीमत पर निरसा को धनबाद नहीं बनने देगा।

विस्थापित समस्या के लिए पिता-पुत्र जिम्मेदार

मंडल ने रविवार को दहीबाड़ी में झामुमो के धरना स्थल में प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि यहां के विस्थापित अपने हक के लड़ाई के लिये सजग है। उसके बाद भी निरसा के पूर्व विधायक अरूप चटर्जी लोगों को बरगला कर रोटी सेंकना चाहते है। उन्होंने कहा यह सौभाग्य की बात है कि निरसा में ईसीएल, बीसीसीएल ,डीवीसी के साथ औधोगिक प्रतिष्ठान है। लेकिन विस्थापितों की समस्या का हल नही हुआ। निरसा में पिता-पुत्र ( गुरुदास चटर्जी-अरुप चटर्जी) का 25 वर्ष तक राज चला। लेकिन विस्थापित समस्या के समाधान के लिए कोई पॉलिसी नही बनी। चाहे वह डीवीसी पंचेत के 10 हजार व मैथन के 5211 विस्थापित का मामला हो या ईसीएल चापापुर, कापासड़ा का मुद्दा हो या बीसीसीएल के पलासिया का। एमसीसी आज के दिन में मनी कलेक्शन कमेटी बन गई है। उन्होंने कहा जब यहां के लोग अपने हक के लिये लड़ रहे है तो वो यहां भीड़ जुटा कर अरुप क्या साबित करना चाहते हैं?  पिता-पुत्र ने विस्थापितों के नाम पर ठगी का काम किया है। इस माैके पर बोदी लाल हांसदा, उपेंद्र नाथ पाठक, ठाकुर मांझी, बाबू जान मरांडी, देवेन टुडू, दिलीप महतो, फारुख अंसारी, अब्दुल रब, बीएन पाल, काली दास ,दुलाल भंडारी, प्रदीप कुंभकार सहित अन्य उपस्थित थे।

हिंसा के लिए पुलिस भी जिम्मेदार

पुलिस की चूक से शनिवार को दहीबाड़ी आउटसोर्सिंग बी पेंच में झामुमो व मासस समर्थकों के बीच हुई हिसंक झड़प हुई। मासस का यह कार्यक्रम पूर्व निर्धारित था। इसकी जानकारी मासस समर्थकों ने स्थानीय पुलिस को पहले ही दे चुके थे। इसके बावजूद पंचेत ओपी पुलिस ने पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती नहीं की थी। कल्याण चक के ग्रामीणों ने झामुमो के बैनर तले मासस समर्थकों को जब जुलूस लेकर आगे जाने से रोका तो कुछ ही पुलिसकर्मी मामले को शांति कराने में जुटे थे। इसी बीच जुलूस में शामिल मासस समर्थकों के धक्के से झामुमो समर्थक बाबूजान जमीन पर गिरकर घायल हो गए। इससे झामुमो समर्थक उग्र हो गए। देखते ही देखते कल्याण चक के आदिवासी गांव से काफी संख्या में महिला व पुरूष तीर-धनुष, लाठी व कुल्हाड़ी लेकर पहुंच गए और जुलूस को आगे जाने से रोक दिया। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प शुरू हो गई। पथराव शुरू हो गया। काफी कम संख्या होने के कारण भीड़ के सामने पुलिस की भी नहीं चली। इसके बाद मासस समर्थकों को वहां से भागना पड़ा।

पहले भी हो चुकी है झामुमो व मासस के बीच मारपीट की घटना

मासस व झामुमो का विवाद 23 सितंबर 2021 से ही शुरू हो गया था। उस दौरान सद्भाव कंपनी के मजदूरों के बकाया व नई आने वाले कंपनी में रोजगार देने की मांग को लेकर महेश प्रसाद के नेतृत्व में मासस ने रैली निकाली थी। उस दौरान भी झामुमो समर्थकों ने रैली का विरोध किया था और दोनों ओर से झड़प हुई थी। पुलिस ने दोनों ओर से मामला दर्ज कराया गया था।

झामुमो समर्थकों ने ही अरूप को भीड़ से निकाला

झड़प के दौरान पूर्व विधायक अरूप चटर्जी को कुछ झामुमो समर्थक ग्रामीणों ने घेर लिया। इसी बीच वहां झामुमो नेता बोदीलाल हांसदा कुछ समर्थकों के साथ पहुंच गए और अरूप चटर्जी को निकाला। बोदीलाल का कहना था कि ग्रामीण काफी गुस्से में हैैं। कुछ भी कर सकते हैैं। इस पर अरूप भी कहने लगे कि मुझपर कौन हमला करता है देखते हैैं। इसके बाद बोदीलाल ने उनसे निकल जाने की विनती की। अरूप भी बोदीलाल की बातों को मानकर वहां से निकल गए। बोदीलाल व उनके कुछ समर्थक अरूप चटर्जी के साथ चलकर आगे तक छोड़ दिया।

प्रबंधन कुछ लोगों को राजनीतिक फायदे के लिए आगे कर लड़ाना चाहता है। बीसीसीएल में नौकरी करने वाले लोग भी हाजिरी बनाकर मारपीट की घटना में कैसे शामिल हुए इसकी जांच होनी चाहिए। हमारे कार्यकर्ता शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे। इसी बीच झामुमो समर्थकों ने कुल्हाड़ी, लाठी-डंडा व पत्थर से वार कर दिया। इससे कई मासस कार्यकर्ता घायल हो गए हैैं। पुलिस इस मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे।

-अरूप चटर्जी, पूर्व विधायक, निरसा

आउटसोर्सिंग बी पैैंच में झामुमो कार्यकर्ता बोदीलाल हांसदा व ग्रामीणों की जमीन गई है। वे लोग जमीन के बदले मुआवजा व नौकरी की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैैं। अरूप चटर्जी बाहरी लोगों को नौकरी दिलाने के बहाने राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैैं। झामुमो ऐसा नहीं होने देगा। प्रबंधन पहले विस्थापितों के हक व अधिकार दे। मासस को इस मामले में दखल देना गलत है।

-अशोक मंडल, केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य, झामुमो

Edited By: Mritunjay