दिलीप सिन्हा, धनबाद : झामुमो के संस्थापक बिनोद बिहारी महतो हों या फिर अध्यक्ष शिबू सोरेन दोनों की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का काम उनकी नई पीढ़ी ने किया है। इसी कड़ी में झामुमो के वरिष्ठ नेता व टुंडी के विधायक मथुरा प्रसाद महतो, प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष व बाघमारा के पूर्व विधायक जलेश्वर महतो एवं सिंदरी के पूर्व विधायक फूलचंद मंडल का नाम जुट गया है। इनके अलावा पूर्व मंत्री व दिग्गज नेता समरेश सिंह के करीबी रहे झाविमो नेता रामकुमार चौधरी एवं झामुमो के केंद्रीय कमेटी के पूर्व सदस्य व जिला परिषद के निवर्तमान सदस्य दुर्योधन चौधरी भी इसी सूची में शामिल हैं।

इस कड़ी में शामिल मथुरा महतो के भांजे व झामुमो जिला सचिव पवन महतो के पुत्र विकास कुमार महतो जिप सादस्य का चुनाव हार गए हैं। उन्हें कांग्रेस के इसराफिल उर्फ लाला अंसारी ने हराया है। इधर इस कड़ी में शामिल रामकुमार चौधरी की बहू कुमारी रूपा ने बाजी मार ली है। उन्होंने धनबाद सदर से निवर्तमान जिला परिषद सदस्य व भाजपा नेता प्रियंका पाल को हरा दिया है। जलेश्वर महतो की बहू का चुनाव परिणाम अब तक नहीं आया है।

राजनीतिक विरासत को और आगे ले जाने के लिए इन नेताओंं ने पंचायत एवं नगर निगम चुनाव के जरिए अपनी अगली पीढ़ी को मैदान में उतार दिया है। किसी का बेटा तो किसी की बहू, किसी का भांजा तो किसी का बेटा-बहू दोनों मैदान में हैं।

प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष व पूर्व मंत्री जलेश्वर महतो ने अपनी बहू रीना कुमारी को महुदा क्षेत्र से जिला परिषद सदस्य के लिए मैदान में उतारा है। जिला परिषद अध्यक्ष का सीट धनबाद में महिला आरक्षित है। ऐसे में जलेश्वर की रणनीति चुनाव में सफलता मिलने पर अपनी बहू को जिला परिषद अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाना है। इसी तरह झामुमो विधायक मथुरा प्रसाद महतो के भांजा एवं झामुमो के जिला सचिव पवन महतो के पुत्र विकास महतो राजगंज क्षेत्र से जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़े हैं। इस सीट का प्रतिनिधित्व लगातार दो बार से पवन महतो का ही परिवार कर रहा है। पहली बार पवन महतो जीते थे तो दूसरी बार उनकी पत्नी व मथुरा महतो की बहन नूनीबाला देवी। इस बार पवन महतो ने अपने बेटे विकास कुमार महतो को उतारा था। वह अपने माता-पिता की सीट नहीं बचा सका है।

मथुरा इसके पूर्व अपने बेटे दिनेश महतो को धनबाद के मेयर के चुनाव में उतार चुके हैं। पहली बार चुनाव लड़ रहे दिनेश महतो भले ही चुनाव जीत नहीं पाए थे, लेकिन शहरी क्षेत्र होने के बावजूद उन्होंने मेयर चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया था। सिंदरी के पूर्व विधायक व झामुमो के वरिष्ठ नेता फूलचंद मंडल की पुत्रवधू रीना मंडल भी बरवाअड्डा क्षेत्र से जिला परिषद का चुनाव लड़ रही हैं। वह फूलचंद के छोटे बेटे आशीष मंडल की पत्नी हैं। फूलचंद के बड़े बेटे धरनीधर पहले से ही झामुमो की राजनीति में सक्रिय हैं और अपने पिता की राजनीतिक विरासत संभालने की कोशिश कर रहे हैं।

इधर झारखंड वनांचल कांग्रेस एवं झारखंड विकास मोर्चा के वरिष्ठ नेता रहे धनबाद के रामकुमार चौधरी ने राजनीति में अपने बेटे भानू प्रताप एवं बहू कुमारी रूपा दोनों को उतार दिया है। भानू प्रताप धनबाद प्रखंड के निवर्तमान प्रमुख हैं जबकि उनकी पत्नी कुमारी रूपा जिला परिषद सदस्य धनबाद क्षेत्र से चुनाव लड़ रही हैं। झामुमो अध्यक्ष शिबू सोरेन के करीबी रहे झामुमो नेता दुर्योधन चौधरी ने अपनी राजनीतिक विरासत को संभालने के लिए अपने बेटे एवं बहू को उतार दिया है। दुर्योधन जिला परिषद की जिस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, उस सीट से इस बार उनके बेटे त्रिपुरारी चौधरी की पत्नी रुबी कुमारी चुनाव लड़ रही है। इसके अलावा दुर्योधन बड़े बेटे मुरारी चौधरी बड़ा

पिछरी से पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ रहे हैं।

Edited By: Atul Singh