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झारखंड के स्कूलों में आवारा कुत्तों के नो-एंट्री का आदेश, सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी के बाद एक्शन में शिक्षा विभाग

Published: Sat, 22 Aug 2026 08:52 PM (IST)

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सभी शैक्षणिक संस्थानों में आवारा कुत्तों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

HighLights

  1. स्कूलों में आवारा कुत्तों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाई गई।

  2. सुरक्षा के लिए मजबूत बाउंड्रीवाल, गेट और नोडल अधिकारी।

  3. लापरवाही बरतने पर संबंधित अधिकारियों पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई।

जागरण संवाददाता, धनबाद। राज्य के सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने बड़ा व कड़ा कदम उठाया है।

सर्वोच्च न्यायालय के सिटी हाउंडेड बाय स्ट्रेज, किड्स पे प्राइस मामले में आदेश के आलोक में राज्य परियोजना निदेशक ने डीईओ को पत्र जारी कर सभी विद्यालयों में आवारा कुत्तों के प्रवेश एवं निवास पर पूरी तरह से रोक लगाने तथा सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के निर्देश दिए हैं।

न्यायालय ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि स्कूलों व शैक्षणिक परिसरों में आवारा कुत्तों के हमलों से सुरक्षा सुनिश्चित करने में कोई ढिलाई या लापरवाही बरती जाती है तो संबंधित प्रशासनिक व विभागीय अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय की अवमानना के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इसी क्रम में डीईओ अभिषेक झा ने सभी बीईईओ को अविलंब निर्देशों का अनुपालन करते हुए रिपोर्ट मांगी है।

सुरक्षा एवं स्वच्छता के लिए सात प्रमुख निर्देश

  1. सभी विद्यालयों में आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए मजबूत बाउंड्रीवाल, गेट तथा सुरक्षा घेरा उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
  2. प्रत्येक स्कूल में परिसर की स्वच्छता और कुत्तों की रोकथाम के लिए एक नोडल पदाधिकारी नियुक्त होंगे। इनका नाम व संपर्क विवरण स्कूल के मुख्य द्वार पर प्रदर्शित होगा तथा स्थानीय नगर निकाय को भी सौंपा जाएगा।
  3. विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए जानवरों के आसपास सुरक्षित रहने के तरीके, कुत्ते के काटने पर प्राथमिक उपचार तथा त्वरित सूचना देने की प्रक्रिया पर जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएंगे।
  4. स्कूलों में कचरे (विशेषकर भोजन के अवशेष) के निस्तारण की समुचित व्यवस्था होगी, ताकि आवारा पशु भोजन के लालच में परिसर की ओर आकर्षित न हों।
  5. विद्यालय स्तर पर प्रति तीन माह में निरीक्षण किया जाएगा। यह सुनिश्चित हो सके कि आवारा कुत्तों ने परिसर में डेरा या ठिकाना न बनाया हो।
  6. सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित करने के लिए नियमित मानीटरिंग एंड रिपोर्टिंग मैकेनिज्म लागू रहेगा।
  7. जिले के कुल शैक्षणिक संस्थानों की संख्या के साथ सुरक्षा मानकों के अनुपालन की रिपोर्ट तैयार कर राज्य मुख्यालय को भेजी जाएगी।

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विद्यालय परिसर में आवारा कुत्ते पाए जाते हैं तो स्कूल तुरंत स्थानीय नगर निगम या जिला प्रशासन की मदद से उन्हें वहां से सुरक्षित बाहर करेंगे। साथ ही पशु कल्याण बोर्ड से जारी मानक संचालन प्रक्रिया का कड़ाई से अनुपालन किया जाएगा। सभी बीईईओ को निर्देश दे दिया गया है।

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- अभिषेक झा, जिला शिक्षा पदाधिकारी