जागरण संवाददाता धनबाद: राज्य के अन्य कर्मियों की तरह एमएसीपी का लाभ शिक्षकों को भी मिलना चाहिए। पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को स्नातक प्रशिक्षित का वेतन उस तिथि से दिया जाए जिस तिथि से स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों की सीधी नियुक्ति की गई है। सहित कुल 9 मांगों को लेकर झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ का एक शिष्टमंडल राजेंद्र शुक्ल की अध्यक्षता में झारखंड सरकार के शिक्षा सचिव से मिला। प्रतिनिधिमंडल में अमित कुमार महतो, उपाध्यक्ष निरंजन कुमार, सचिव उमा चरण शाहू एवं शशिकांत कुमार गुप्ता शामिल थे। शिक्षा सचिव ने सभी समस्याओं को समाधान करने का आश्वासन दिया।

शिक्षक संघ की मांग

- मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक के पद को अक्षुण रखा जाए और इस पद पर अभिलंब प्रोन्नति दी जाए।

- शिक्षकों के प्रोन्नति हेतु वरीयता सूची बनाना आरडीडीई से अनुमोदन कराना एवं स्थापना समिति से पास कराने हेतु समय सीमा निर्धारित किया जाए, ताकि जैसे ही झारखंड सरकार से प्रोन्नति पर लगी रोक हटते ही तुरंत प्रोन्नति दी जा सके।

- मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक के पद पर किसी भी परिस्थिति में मध्य विद्यालय के लिए नियुक्त शिक्षकों को ही प्रभारी प्रधानाध्यापक बनाया जाए और वर्ग 9 से 12 के लिए अलग से प्रधानाध्यापक बनाया जाए । इस प्रकार एक ही कैंपस में चल रहे मध्य विद्यालय के लिए अलग प्रधानाध्यापक एवं प्लस टू विद्यालय के लिए अलग प्रधानाध्यापक की व्यवस्था की जाए।

- कॉमर्स में नियुक्त शिक्षकों को सामाजिक विज्ञान में उच्च न्यायालय रांची के आलोक में ग्रेड चार में प्रोन्नति हेतु सामाजिक विज्ञान विषय में सम्मिलित हेतु आदेश निर्गत किया जाए।

- किसी भी परिस्थिति में मध्य विद्यालयों की संख्या जो 3500 है। उसे बरकरार रखा जाए क्योंकि एक से 12 तक के लिए प्रधानाध्यापक का अस्थाई रूप से पत्र निर्गत होने के कारण असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसलिए किसी भी परिस्थिति में मध्य विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक मध्य विद्यालय में नियुक्त शिक्षकों को ही बनाया जाए।

- जिले के शिक्षकों को 1998 से प्रवरण वेतनमान दिया जाए।

- निदेशालय सचिवालय एवं झारखंड शिक्षा परियोजना से तीन तरफा निकलने वाले पत्रों पर रोक लगाई जाए और सिर्फ सचिव स्तर से ही पत्र निकाला जाए क्योंकि तीन तरफा पत्र निकलने से शिक्षकों को दायित्व का निर्वहन करने में दिक्कतें होती है।

Edited By: Atul Singh