धनबाद, जेएनएन। मोदी सरकार ने कृषि सुधार पर दो बिल पारित कर किसानों को समृद्ध बनाने की शुरुआत कर दी है। इन बिलों के पारित हो जाने के बाद बिचौलियों की भूमिका खत्म हो गई है। यही वजह है कि वे हंगामा खड़ा कर रहे हैं। विपक्ष सिर्फ विरोध के लिए विरोध कर रहा है। किसानों का जो आंदोलन दिख रहा है उसमें किसान नहीं हैं। आंदोलन के पीछे देश में विपक्ष के कुछ वैसे बड़े नेताओं का हाथ है किसानों का हक मारकर अपनी तिजोरी भरते रहे हैं। यह कहना है झारखंड प्रदेश भाजपा प्रवक्ता सरोज सिंह का।

किसान किसी भी बाजार समिति में जाकर अपना उत्पाद बेच सकता

कृषि विधेयक को लेकर संसद से सड़क तक छिड़ी लड़ाई के बीच भाजपा ने जनता के बीच सच्चाई रखने के लिए अभियान शुरू किया है। इसी क्रम में प्रदेश प्रवक्ता सरोज सिंह सोमवार को धनबाद में थे। उन्होंने सक्रिट हाउस में सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कृषि उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) विधेयक के पास होने से अब किसान किसी भी बाजार समिति में जाकर अपना उत्पाद बेच सकते हैं। व्यापारी भी किसी समिति से बंधे नहीं रह गए हैं। वे किसी भी बाजार समिति से जाकर उत्पाद खरीद सकते हैं। इससे बाजार समितियों की मनमानी खत्म हो जाएगी।

किसान को मिलेगा करार से ज्यादा मूल्य

सिंह ने बताया कि कृषि (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा कर करार विधेयक के पास होने से किसान फसल बोने के साथ ही व्यापारी के साथ करार कर सकेगा। इसका फायदा यह भी है कि फसल तैयार होने पर यदि करार के मूल्य से बाजार मूल्य अधिक है तो किसान को अधिकतम मूल्य ही प्राप्त होगा। इतना ही नहीं विवाद की स्थिति में उसका निपटारा 30 दिन में करना जरूरी होगा।

कांग्रेस कर रही राजनीति

सिंह ने कहा कि कांग्र्रेस ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में जिस स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिश लागू करने की बात कही थी, उसे ही लागू किया गया है। अब वह विरोध क्यों कर रही है यह बताना चाहिए। कांग्र्रेस हमेशा से ऐसा ही करती रही है। उसे किसानों के हित से नहीं बिचौलियों के हित से मतलब है। पत्रकार वार्ता में महानगर अध्यक्ष चंद्रशेखर सिंह, ग्रामीण जिला अध्यक्ष ज्ञान रंजन सिन्हा, संजय झा, मानस प्रसून, मिल्टन पार्थसारथी आदि थे।

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