देश के 57 संयंत्रों में कोयले का स्टॉक काफी कम, झारखंड के पावर प्लांट में भी संकट; BCCL बढ़ाएगी सप्लाई
झारखंड के दो पावर प्लांट सहित देश के 57 संयंत्रों में कोयले का स्टॉक मानक से काफी कम है। इस ...और पढ़ें

कोयला स्टाक संकट पर बढ़ी निगरानी, बीसीसीएल से पतरातु को बढ़ानी होगी सप्लाई।
HighLights
झारखंड के दो पावर प्लांटों में कोयला स्टॉक गंभीर स्थिति में।
देश के 57 बिजली संयंत्रों में कोयले की भारी कमी।
बीसीसीएल को पतरातु पावर प्लांट को आपूर्ति बढ़ानी होगी।
जागरण संवाददाता, धनबाद। देश के थर्मल पावर प्लांटों में घटते कोयला स्टॉक को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसे देखते हुए बीसीसीएल से पतरातु पावर प्लांट को कम से कम एक अतिरिक्त रैक कोयला उपलब्ध कराने को कहा गया है।
बीसीसीएल के सेल्स विभाग के अधिकारी ने रविवार को इसकी पुष्टि की। कंपनी के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल भी पावर प्लांटों तक अधिक से अधिक कोयला पहुंचाने की स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं।
देश के 57 पावर प्लांटों में स्टॉक कम
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के आंकड़ों के अनुसार, देश के 57 पावर प्लांटों में कोयले का स्टॉक निर्धारित मानक से काफी नीचे है। इन संयंत्रों की कुल क्षमता करीब 223.87 गीगावाट है। इनके पास लगभग 27.14 मिलियन टन कोयला उपलब्ध है, जो निर्धारित नॉर्मेटिव स्टॉक का करीब 47 प्रतिशत है।
कम स्टॉक वाले बिजली संयंत्रों में कोयले की आपूर्ति बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। बिजली उत्पादन प्रभावित न हो, इसके लिए संबंधित कोयला कंपनियों को जरूरत के अनुसार आपूर्ति बढ़ाने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
झारखंड के दो प्लांट क्रिटिकल श्रेणी में
सीईए के मुताबिक, झारखंड के दो बिजली संयंत्र क्रिटिकल कोल स्टॉक की श्रेणी में हैं। इनमें पतरातु पावर प्लांट भी शामिल है। वहीं, नॉर्थ कर्णपुरा पावर प्लांट में भी पर्याप्त कोयला स्टॉक बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
झारखंड देश के प्रमुख कोयला उत्पादक राज्यों में शामिल है। ऐसे में राज्य के बिजली संयंत्रों में कोयला स्टॉक की स्थिति को गंभीरता से लिया जा रहा है।
राज्यवार स्थिति की बात करें तो उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 11 पावर प्लांट क्रिटिकल कोल स्टॉक की श्रेणी में हैं। इसके बाद राजस्थान में आठ और मध्य प्रदेश में छह संयंत्र हैं। महाराष्ट्र और तमिलनाडु में पांच-पांच, जबकि छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश में चार-चार बिजली संयंत्र इस स्थिति में हैं।
गृह मंत्रालय भी रख रहा निगरानी
पावर प्लांटों में कोयले के स्टॉक और आपूर्ति की स्थिति पर गृह मंत्रालय की ओर से भी निगरानी रखी जा रही है। संबंधित एजेंसियों और कोयला कंपनियों से जरूरत के अनुसार आपूर्ति बढ़ाने तथा बिजली संयंत्रों में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य कोयले की कमी का असर बिजली उत्पादन पर पड़ने से रोकना है।
कोयला स्टॉक कम होने की स्थिति में बिजली संयंत्रों को निर्बाध आपूर्ति की जरूरत होती है। ऐसे में बीसीसीएल समेत अन्य कोयला कंपनियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है कि पावर सेक्टर को प्राथमिकता के आधार पर कोयला उपलब्ध कराया जाए। पतरातु पावर प्लांट को अतिरिक्त रैक देने की पहल इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
