धनबाद, जेएनएन। लॉकडाउन के चलते मुंबई में फंसे झारखंड के मजदूरों ने सीएम हेमंत सोरेन से अपनी जान बचाने के लिए गुहार लगाई है। कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तरह हम प्रवासी मजदूरों को भी मुंबई से निकाला जाए। यदि यह नहीं हो सकता तो कम से कम मुंबई में ही हमारे खाने-पीने व रहने की व्यवस्था हो जाए ताकि अपनी जान बचा सकें, वरना कोरोना तो बाद में उसके पहले भूख से मर जाएंगे।

दरअसल, मुंबई के गारमेंट्स समेत विभिन्न सेक्टर में काम करने वाले धनबाद, गिरिडीह, बोकारो, कोडरमा व हजारीबाग जिले के करीब 20 हजार से अधिक मजदूर वहां फंसे हैं। इनमें सबसे अधिक गिरिडीह जिले के बगोदर, डुमरी, सरिया एवं राजधनवार के रहनेवाले मजदूर हैं।

मुंबई में फंसे डुमरी के जसीम अंसारी व शाहिद अंसारी ने कहा कि हमलोग अपने घर नहीं लौट पा रहे हैं। ऐसे में अब स्थिति ऐसी हो गई है कि मुंबई में एक दिन भी रहना मुश्किल हो रहा है। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग की बात कही जा रही है, जबकि एक कमरे में 20 से 25 लोग रह रहे हैं। शौचालय तक जाने के लिए पुलिस का डंडा पड़ता है। कमरे के बाहर एक लकीर है, उससे बाहर निकलने पर रोक है।

कहा कि हमारे सामने भूख से मरने के अलावा कोई रास्ता नहीं दिख रहा है। महाराष्ट्र सरकार उनके लिए कुछ भी नहीं कर रही है। मुंबई में ही फंसे बगोदर के बेको निवासी शमसुल ने बताया कि बुधवार को दिल्ली सरकार की 16 बड़ी-बड़ी बसें आईं और अपने यहां के लोगों को ले गई। झारखंड सरकार व झारखंड के नेता ऐसा कुछ भी नहीं कर रहे हैं।

प्रवासी मजदूरों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्त्ता सिकंदर अली ने गुरुवार की सुबह बगोदर-सरिया के एसडीओ रामकुमार मंडल से मिलकर उन्हें इसके बारे में पूरी जानकारी दी। एसडीओ ने बाद में दैनिक जागरण को बताया कि वे इस मामले में अपनी रिपोर्ट गिरिडीह के उपायुक्त को देंगे। इधर, सिकंदर अली ने बताया कि झारखंड सरकार के हेल्प डेस्क से भी इन पीड़ित मजदूरों को राहत नहीं मिल रहा है।

Posted By: Sagar Singh

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