विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

झरिया में पुनर्वास का मास्टर प्लान तैयार, विस्थापितों के लिए बनेगी मॉडल टाउनशिप

Published: Sun, 06 Sep 2026 01:52 PM (IST)

झरिया के अग्नि एवं भू-धंसान प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास के लिए कोयला मंत्रालय संशोधित मास्टर प्लान पर काम कर रहा ...और पढ़ें

एआई जनरेटेड फोटो

एआई जनरेटेड फोटो

जागरण संवाददाता, धनबाद। झरिया के अग्नि एवं भू-धंसान प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास की दिशा में कोयला मंत्रालय लगातार काम कर रहा है। मंत्रालय की टीम स्थानीय अधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर संशोधित मास्टर प्लान को धरातल पर लागू करने में जुटी है।  

जेआरडीए के सलाहकार पद से अलग हुए जितेंद्र मल्लिक ने रविवार को बातचीत में कहा कि झरिया का भू-धंसान प्रभावित क्षेत्र काफी खतरनाक है। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद से माइनिंग इंजीनियरिंग में स्नातक करने के बाद कोल इंडिया लिमिटेड से जुड़े और धनबाद की विभिन्न कोलियरियों में प्रोजेक्ट आफिसर रहे।

बाद में एनसीएल में निदेशक (तकनीकी) पद पर पदोन्नत हुए। सेवानिवृत्ति के बाद बीसीसीएल के वरिष्ठ सलाहकार तथा झरिया पुनर्वास विकास प्राधिकार के कौशल विकास एवं आजीविका के वरिष्ठ सलाहकार रहे और कौशल एवं आजीविका विभाग की स्थापना में मुख्य भूमिका निभाई।

WhatsApp Image 2026-09-06 at 11.19.58 AM

संशोधित मास्टर प्लान में कोयला मंत्रालय की भूमिका अहम है और उसके नेतृत्व में योजनाओं को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह अभी और काम करना चाहते थे, लेकिन माता की तबीयत ठीक नहीं रहने के कारण पद छोड़ना पड़ा।

धनबाद और यहां के लोगों से 20 वर्षों से अधिक समय से जुड़े मल्लिक व्यक्तिगत परिस्थितियों के कारण पद छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां अनुकूल होने पर भविष्य में फिर धनबाद से जुड़ना चाहेंगे और देश व कोयला उद्योग की प्रगति में अपनी योग्यता के अनुसार योगदान देते रहेंगे।

मास्टर प्लान पर काम की योजना 

मल्लिक ने बताया कि अग्नि प्रभावित विस्थापितों के लिए विकसित किए जा रहे टाउनशिप को मॉडल टाउन के रूप में आकार देने की योजना है। पुनर्वास के बाद लोगों की आजीविका सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए कौशल विकास केंद्र स्थापित करने तथा टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में काम चल रहा है। बेलगड़िया में पोल्ट्री फार्मिंग, डेयरी फार्मिंग, मल्टी-स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग और मुफ्त कोचिंग जैसी योजनाओं को शुरू करने में उन्होंने सहयोग दिया।

टाटा स्टील फाउंडेशन के साथ एमओयू में उनका विशेष योगदान रहा, जबकि मशरूम की खेती के लिए आईसीएआर-रांची के साथ समझौते पर जल्द हस्ताक्षर होने हैं।

झरिया अग्नि प्रभावित क्षेत्र है और झरिया संशोधित मास्टर प्लान में करीब 15000 लोगों को पुनर्वास करना है। झरिया अग्नि प्रभावित क्षेत्र में 595 क्षेत्र आती खतरनाक घोषित किए गए हैं उसमें 81अति संवेदनशील प्रभावित क्षेत्र है जहां 15000 परिवार हैं, जिन्हें 2028 तक पुनर्वास करना है।

यह भी पढ़ें- झारखंड में मंत्री पद पर रहते हुए चार झामुमो दिग्गजों का निधन, उपचुनाव में परिजनों ने बरकरार रखी सीटें