जागरण संवाददाता, धनबाद: अपनी एक्टिंग का लोहा मनवा चुके झरिया के कलाकार जावेद पठान जल्‍द नई भूमिका में नजर आएंगे। सोनी सब टेलीविजन पर प्रसिद्ध धारावाहिक धर्म योद्धा गरुड़ में वह तारकासुर का किरदार निभा रहे हैं। धर्म योद्धा गरुड़ में मां शैलपुत्री की कहानी में जावेद पठान तारकासुर के रूप में नजर आएंगे। सोनी सब टेलीविजन पर यह धारावाहिक सोमवार से शुक्रवार तक शाम 7:30 बजे प्रसारित होता है।

पौराणिक कथाओं में मजबूत दानव के रूप में है तारकासुर का उल्लेख

अभिनेता जावेद पठान ने फोन पर बात करते हुए बताया कि मां शैलपुत्री की कहानी इस शो का आगामी ट्रैक है और मैं मुख्य भूमिका निभा रहा हूं। इस कहानी में खलनायक हूं, मेरे चरित्र का नाम तारकासुर है। तारकासुर एक शैतान है और वह पौराणिक कथाओं के सबसे मजबूत दानवों में से एक है। मदर्स नेचर स्टूडियो, नायगांव में शूटिंग चल रही है। यह धारावाहिक कॉन्टिलो पिक्चर्स प्रोडक्शन हाउस द्वारा निर्मित है, जिसके मालिक अभिमन्यु सिंह और रूपाली हैं।

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कई एल्बम और धारावाहिकों में किया काम

जावेद पठान ने बताया कि इस कॉन्टिलो चित्रों के साथ यह मेरा पांचवां प्रोजेक्ट है। इससे पहले मैंने इसी प्रोडक्शन हाउस के साथ महाराणा प्रताप, हनुमान, विघ्नहर्ता गणेश और स्वराज किया है। यह अभिनेता का जीवन है। विघ्नहर्ता गणेश शो में मैंने सकारात्मक भूमिका निभाई। उसमें मैं शिवपुत्र कार्तिकेय और सेनापति था, लेकिन इस शो गरुड़ में मैं नकारात्मक किरदार हूं। इसके अलावा जावेद ने जोधा अकबर जैसे प्रसिद्ध धारावाहिक में भी भूमिका निभाई है। जी म्यूजिक की ओर से भी उन्होंने कई एल्बम बनाए हैं, जो काफी प्रसिद्ध रहे।

सड़क से शुरू किया फिल्‍मी कॅरियर

बकौल जावेद, जब वह मुंबई पहुंचे तो उनके पास केवल दो हजार रुपये थे। ये पैसे खत्म हुए तो जावेद के सामने खुद को सिनेनगरी में स्थापित करने के साथ रोजी-रोटी चलाने की भी चुनौती थी। जावेद बताते हैं कि मुंबई में काम की तलाश में उन्हें महीनों भटकना पड़ा। कई दिन भूखे भी रहना पड़ा। घर का किराया देने के पैसे नहीं थे। इस कारण सड़क किनारे भी सोना पड़ा। मुंबई के मोहम्मद अली रोड स्थित नूर मोहम्मदी होटल में काफी मुश्किल से वेटर का काम मिला। यहां हर तरह के काम करने पड़े। इसके बाद मालिक ने काम से खुश होकर अपने गेस्ट हाउस में मैनेजर बना दिया। गेस्ट हाउस में लगभग छह महीने तक काम किया। इसी दौरान कुछ मित्रों ने मदद की और मेरे सपनों को मंजिल मिली। जवोद बताते हैं कि लगातार सात वर्षों तक कठिन संघर्ष के बाद उन्हें पहचान मिली।

Edited By: Deepak Kumar Pandey

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