धनबाद, जेएनएन। आइआइटी-आइएसएम (IIT-ISM) के इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनिरिंग के रिसर्च स्कॉलर सह इसरो वैज्ञानिक धरवेंद्र यादव ने शनिवार को संस्थान में आयोजित कॉनसेटो में बतौर वक्ता शिरकत की। इस दौरान कहा कि इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) चांद के बाद आदित्य मिशन के तहत सूरज पर जाने की तैयारी कर रहा है। चंद्रयान-2 के सफल प्रक्षेपण के बाद इसरो का अगला लक्ष्य सूर्य है। आदित्य-एल 1मिशन के तहत सूर्य मंडल की परत फोटोस्फीयर व क्रोमोस्फीयर का अध्ययन किया जाएगा। सूर्य से निकलने वाले विस्फोटक कणों पर शोध होगा। आज ग्लोबल वार्मिंग की समस्या विकराल हुई है। इसकी चुनौतियों से निपटने के लिए भी इसरो एक खास मिशन पर काम कर रहा है।

अंतरिक्ष में इंसान भेजेगा इसरो : चंद्रयान-2 मिशन के बाद इसरो के वैज्ञानिक गगनयान मिशन की तैयारी में जुटे हैं। इसरो पहली बार इंसान को इस मिशन के तहत अंतरिक्ष भेजेगा। धरवेंद्र मिशन चंद्रयान-2 के ऑपरेशन मैनेजर हैं। चंद्रयान -2 के बारे में बताया कि चांद पर विक्रम लैंडर की स्थिति की तस्वीर ऑर्बिटर ने कैमरे में ली थी। ऑर्बिटर के जरिए विक्रम लैंडर को संदेश भेजने की कोशिश हो रही है। ताकि उसका संपर्क  तंत्र ऑन किया जा सके। इसरो की टीम पता लगा रही है कि किन कारणों से लैंडर का संपर्क टूट गया था।

आर्बिटर के पास पर्याप्त ईंधन, उम्र साढ़े सात वर्ष : ऑर्बिटर की उम्र साढ़े सात साल से अधिक है। उसके पास पर्याप्त ईंधन है। इसलिए ऑर्बिटर पर लगे उपकरण काम करते रहेंगे। लैंडर से संपर्क साधने के लिए हर प्रयास हो रहा है। अभी लूनर डे चल रहा है। चंद्रमा का एक लूनर डे धरती के 14 दिन के बराबर होता है। अभी चांद पर दिन है। उसके बाद रात होगी तब वैज्ञानिकों को इंतजार करना पड़ेगा।

इसलिए है  खास मिशन गगनयान : गगनयान मिशन भारतीय मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन है। इस मिशन में पहली बार इसरो तीन भारतीयों को अंतरिक्ष में सात दिन की यात्रा के लिए भेजेगा। मिशन गगनयान के लिए अंतरिक्ष यात्रियों के चयन का पहला चरण पूरा कर लिया गया है। यह प्रक्रिया इंस्टीट्यूट ऑफ एयरस्पेस मेडिसिन में भारतीय वायुसेना कर रही है। इसरो 2022 तक अंतरिक्ष यात्रियों को भेज देगा और वापस लेकर आएगा। यह मिशन देश की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की क्षमता का अहसास दुनिया को कराएगा। अंतरिक्ष यात्री इस मिशन के तहत विभिन्न प्रकार के माइक्रो ग्रेविटी टेस्ट को अंजाम देंगे।

हजारों किमी में फैली तेजोमंडलः सूर्य की बाहरी परत को तेजोमंडल कहते हैं। यह हजारों किमी तक फैली है। आदित्य-एल 1 पृथ्वी से 1.5 मिलियन किमी की दूरी पर स्थित होगा। वहां से वह हमेशा सूर्य की ओर देखेगा।

Posted By: Mritunjay

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