धनबाद, दीपक कुमार पाण्डेय: मधुपुर विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में अब तक जातीय समीकरण के मायने रहें हों या नहीं, लेकिन इस बार जामताड़ा विधायक डॉ. इरफान की एंट्री ने सोचने पर मजबूर कर दिया है। विधानसभा सीट के मतदाता बताते हैं कि अबतक झामुमो के प्रत्याशी को वोट देने की बात रही हो या फिर भाजपा को, जाति से अधिक क्षेत्र के लिए प्रत्याशियों की उपलब्धि ही महत्वपूर्ण रही।

क्षेत्र में झामुमो का प्रतिनिधित्व करने वाले पार्टी के कद्दावर नेता हाजी हुसैन अंसारी को ना सिर्फ मुस्लिमों ने, बल्कि गैर मुस्लिमों ने भी दिल खोल कर वोट दिए। हालांकि इस बार भाजपा की ओर से राज पलिवार का टिकट काटे जाने को इरफान अंसारी ने ब्राह्मणों के विरुद्ध राजनीति बताई। खुद ब्राह्मण मतदाताओं को भी यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या यह उनके राजनीतिक अस्तित्व पर हमला है! रही-सही कसर चुनाव से ठीक तीन दिन पहले हुई सर्वधर्म ब्राह्मण सभा की बैठक ने पूरी कर दी, जिससे यह सवाल उठने लगे कि क्या मधुपुर विधानसभा उपचुनाव के बहाने ब्राह्मण एकजुट हो रहे हैं?

सारी क़वायद एकजुटता के लिए ही: 

दरअसल ब्राह्मण महासभा का कहना है कि यह बैठक ना सिर्फ इस उपचुनाव, बल्कि हर चुनाव में ब्राह्मणों की सक्रिय भागीदारी और भूमिका के लिए ही है। मधुपुर विधानसभा सीट पर तकरीबन 3 लाख 22 हजार मतदाताओं में ब्राह्मणों की संख्या भले 15 हजार से कम हो, लेकिन बाबानगरी देवघर में पंडों की मौजूदगी का एहसास ना सिर्फ सभी राजनीतिक दलों, बल्कि खुद इन पंडों को भी है। इसलिए सर्वधर्म ब्राह्मण महासभा के बैनर तले ब्राह्मणों को एकजुट करने की कवायद शुरू हुई है, ताकि राजनीति में ये निर्णायक भूमिका निभा सकें। बुधवार को देवघर शहर में बमबम बाबा पथ स्थित रुद्रा आश्रम, हंसकूप में हुई बैठक में जिले के विभिन्न हिस्सों से समाज के करीब एक हजार से अधिक लोग पहुंचे थे। सभा की यह पहली बैठक थी और अगली बैठक 2022 में गोड्डा में करने का निर्णय लिया गया है, ताकि संताल के ब्राह्मण मतदाताओं को भी जोड़ा जा सके।

बुधवार को देवघर में हुई बैठक की अध्यक्षता एकीकृत बिहार के पूर्व मंत्री कृष्णानंद झा ने की। अलग झारखंड के गठन से पहले मधुपुर विधानसभा सीट पर लगातार तीन बार जीत की हैट्रिक लगाकर इन्होंने इस सीट को कांग्रेस की झोली में डाला था। इनके अलावा बैठक में भाजपा नेता राज पलिवार समेत विभिन्न दलों की राजनीति कर चुके और सारठ से चार बार विधायक रह चुके चुन्ना सिंह, कांग्रेस नेता दुर्लभ मिश्रा, पंडा धर्मरक्षिणी महासभा के महामंत्री काॢतक नाथ ठाकुर, पंडा धर्मरक्षिणी महासभा के पूर्व अध्यक्ष रह चुके और भाजपा की राजनीति करने वाले विनोद दत्त द्वारी समेत तमाम अन्य लोग जुटे थे।

बैठक से मधुपुर उपचुनाव का लेना-देना नहीं: 

मधुपुर सीट से चुनाव जीतकर राज्य में मंत्री रह चुके राज पलिवार कहते हैं कि इस बैठक से उपचुनाव का कोई लेना-देना नहीं है। बैठक ब्राह्मणों को एकजुट करने का प्रयास है। उन्होंने दावा किया कि मधुपुर विधानसभा क्षेत्र में इस बार भाजपा मजबूत स्थिति में है और पार्टी को हर वर्ग का समर्थन मिलेगा। दूसरी ओर कृष्णानंद झा बताते हैं बैठक किसी दल विशेष की नहीं, बल्कि महासभा की थी और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में पूरे राज्य में ब्राह्मणों की राजनीतिक स्थिति मजबूत होगी। बाबा मंदिर की पूरी व्यवस्था संभालने वाले पंडों का भी यही कहना है कि बैठक सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि वशिष्ठ, विद्यापति और परशुराम, सबको मानने वालों के लिए है। वहीं यह बैठक भी ना सिर्फ मधुपुर, बल्कि पूरे राज्य और देश में राजनीतिक भागीदारी सुदृढ़ करने के लिए है। कृष्णानंद झा कहते हैं महासभा का अभियान तो अभी शुरू ही हुआ है। समाज के सभी लोगों को इससे जोड़ कर ब्राह्मण महासभा की सक्रियता और बढ़ाई जाएगी।

मंत्री मिथिलेश ने किया ब्राह्मण बाहुल्य गांवों पर फोकस:

सरकार में मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने ब्राह्मण बाहुल्य गांवों पर फोकस किया है। वे झामुमो प्रत्याशी के पक्ष में उनको लामबंद करने की हर कवायद में लगे हैं। जानकारों का कहना है कि सात दिनों से वे इस मुहिम में लग कान्यकुब्ज, भूमिहार, मैथिली व अन्य ब्राह्मणों को एकजुट कर रहे हैं।  

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