चासनाला : स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन के निर्देश पर सेल सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन रांची की दो सदस्यीय टीम रविवार को सेल के चासनाला डीप माइंस खान में शुक्रवार को हुई दुर्घटना की जांच को पहुंची। इस दुर्घटना में सुपरवाइजर महताब आलम की मौत हो गई थी। टीम में रांची एसएसओ के जीएम संजय अग्रवाल, एजीएम सेफ्टी उमेश साहू थे। टीम ने डीप माइंस के पास जीएम खनन कार्यालय में सेल अधिकारियों के साथ बैठक कर जानकारी ली। नक्शा को देखा। चासनाला प्रबंधन ने बताया कि घटना के कारणों को जानने के लिए एक आंतरिक जांच समिति का गठन किया है। समिति में मुख्य महाप्रबंधक कार्मिक संजय तिवारी व जीतपुर कोलियरी के महाप्रबंधक हनुमान प्रसाद शर्मा को रखा गया है। एसएसओ टीम के साथ समिति के लोग भी डोली से अंदर जाकर दुर्घटना स्थल का निरीक्षण किया। टीम सहायक महाप्रबंधक खनन संजय कुमार, खान सुरक्षा प्रबंधक केपी महतो, असंगठित मजदूर श्यामसुंदर मुंडा व रूपलाल गोराई के साथ घटनास्थल गए। इससे पूर्व खदान में जाने से पूर्व सभी अधिकारियों को सैनिटाइज, थर्मल स्क्रीनिग किया गया। हाजिरी बनाने के बाद खान नियमानुसार सभी अधिकारियों को जांच के बाद डोली से खदान में भेजा गया। घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद टीम हाजिरी घर में मृतक की हाजिरी देखा। मेसर्स कोल माइनिग एंड डेवलपमेंट की निविदा से संबंधित जानकारी लेकर कागजातों को खंगाला।

सेल सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन के सहायक महाप्रबंधक सेफ्टी उमेश साहू ने बताया कि सतर्कता में कमी के कारण ही घटना हुई है। फिलहाल घटनास्थल पर कोयले का काफी ढेर लगा है। इस कारण घटनास्थल तक नही पहुंचा जा सकता है। बंकर तक किसी तरह पहुंच देखा गया। घटना के वक्त मौजूद असंगठित मजदूर श्याम सुंदर मुंडा व टुपलाल नोनिया से घटना की जानकारी ली गई। कहा कि कोयले का ढेर हटने के बाद घटना स्थल का मुआयना किया जाएगा। कहा कि खदान में चाल नहीं धंसी है। न ही रूफ फाल हुआ है व न ही कहीं चाल ढीली है। सारी जांच करने के बाद ही रिपोर्ट वरीय प्रबंधन को भेजी जाएगी। देर शाम तक अधिकारी जीएम खनन कार्यालय में बैठ कागजातों की छानबीन करते रहे। घटना में निलंबित अधिकारियों से भी टीम ने बारी-बारी से जानकारी ली।

बता दें कि कोल माइनिग एंड डेवलपमेंट का कार्य आठ मई को समाप्त हो गया था। प्रबंधन की स्वीकृति मिलने के बाद पुन: 21 मई से कार्य प्रारंभ हुआ था। कार्य प्रारंभ होने के दूसरे दिन ही दुर्घटना हो गई। कुछ कर्मियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि महताब कई वर्षों से कोयला खदान में कार्यरत था। वह खान के हर कार्य को जानता था। इस कारण उसे संवेदक ने सुपरवाइजर बनाया था। खान नियमानुसार कार्य के दौरान कोल सूट बंकर के पास जाने की अनुमति किसी को नहीं होती है। ऐसे में मृतक महताब वहां क्यों गया, यह सबसे बड़ा सवाल प्रबंधन के लिए सिरदर्द बन गया है। इसका जवाब जांच के बाद ही मिल पाएगा।

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