धनबाद : करीब डेढ़ दशक बाद इंटक का विवाद आखिरकार समाप्त हो गया। इंटक के दो दिग्गज मजदूर नेता पूर्व मंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह व पूर्व सांसद चंद्रशेखर दुबे उर्फ ददई दुबे ने आपसी गिले शिकवे मिटा लिए। दोनों अपने अपने पुत्र के साथ रविवार को रांची के रासो रिसोर्ट में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत मिले। घंटों बातचीत की। विवाद को समाप्त कर एक साथ मजदूर हितों की सुरक्षा के लिए काम करने का संकल्प लिया।

दोनों नेताओं ने कहा कि इंटक व राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ को मजबूत कर केंद्र सरकार तथा कोल इंडिया प्रबंधन की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष को धार देंगे। दोनों नेता मान रहे हैं कि आपसी विवाद के कारण संगठन को नुकसान हुआ है। कोल इंडिया की सभी कमेटियों से इंटक के अलग रहने का खामियाजा संगठन और मजदूरों को भुगतान पड़ रहा है। 25 जून के बाद दिल्ली में इंटक नेता डॉ. जी संजीवा रेड्डी के साथ राजेंद्र सिंह व ददई दुबे गुट के शीर्ष नेताओं की बैठक होगी। इसमें इंटक, फेडरेशन व आरसीएमएस की नई कमेटी की घोषणा होगी।

अगस्त में न्यायालय में सुनवाई :

दरअसल दोनों गुटों का विवाद न्यायालय भी गया है। अगस्त में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। इसके पहले ही दोनों नेता विवाद को खत्म करना चाहते हैं। एक सप्ताह पहले भी दोनों के बीच बातचीत हुई थी। तभी एकजुटता की नींव रख दी गई थी।

Posted By: Jagran

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