धनबाद, जेएनएन : इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) की ओर से जेबीसीसीआइ-11 में प्रतिनिधित्व की जंग शुरू की जा चुकी है। कोल इंडिया की ओर से इंटक को प्रतिनिधित्व नहीं दिए जाने के खिलाफ इंटक से संबद्ध राष्ट्रीय कोलियरी श्रमिक संघ के महामंत्री वीरेंद्र सिंह बिष्ट ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के जबलपुर बेंच में मुकदमा दायर किया है। बिष्ट ने भारत सरकार के कोयला सचिव, कोल इंडिया के चेयरमैन, कोल इंडिया के श्रमशक्ति व औद्योगिक संबंध महाप्रबंधक व नार्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के सीएमडी के खिलाफ मुकदमा किया है। इस पर शुक्रवार को सुनवाई की संभावना बताई जा रही है। इंटक अध्यक्ष संजीवा रेड्डी ने जिन प्रतिनिधियों की सूची कोल इंडिया अध्यक्ष को भेजी थी उसमें चार वैकल्पिक सदस्यों में बिष्ट भी शामिल हैं।

नौ और मुकदमे होंगे :

जेबीसीसीआइ-11 में अपने प्रतिनिधित्व के लिए संघर्ष की रणनीति का खुलासा करते हुए इंटक के राष्ट्रीय सचिव ने ललन चौबे ने बताया कि यह पहला मुकदमा है। अभी नौ और मुकदमे होने बाकी हैं। चौबे ने बताया कि इंटक प्रमुख संगठन है। सभी श्रमिक संगठनों का विभिन्न विभागों के लिए एक फेडरेशन होता है। कोलियरी क्षेत्र के लिए हमाने इंडियन नेशनल माइन वर्कर्स फेडरेशन बनाया हुआ है। फेडरेशन के तहत कोल इंडिया की विभिन्न अनुषंगी कंपनियों के लिए अलग संगठन कार्यरत हैं। बीसीसीएल में राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ की तरह ही एनसीएल में राष्ट्रीय कोलियरी श्रमिक संघ है जिसने पहला मुकदमा किया है। सभी आठ यूनियनें कुछ-कुछ अंतराल पर इसी तरह मुकदमा दर्ज करेंगी। एक मुकदमा फेडरेशन की ओर से व एक मुकदमा इंटक की ओर से किया जाएगा। इस तरह कुल 10 मुकदमा दर्ज किए जाने की योजना है।

आज फेडरेशन की ओर से मुकदमा :

चौबे ने बताया कि शुक्रवार को कोलकाता में इंडियन नेशनल माइन वर्कर्स फेडरेशन की ओर से मुकदमा दर्ज किया जाएगा। यह मुकदमा कोलकाता हाई कोर्ट में दर्ज किया जाएगा। राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ की ओर से भी कोलकाता हाई कोर्ट में ही मुकदमा किया जाएगा। मदर आर्गनाइजेशन इंटक की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट में बुधवार तक मुकदमा किए जाने की संभावना है।

बिना इंटक के नहीं होगी जेबीसीसीआइ-11 की बैठक :

चौबे के मुताबिक कोल इंडिया प्रबंधन ने केंद्र सरकार की साजिश के तहत गलत निर्णय लिया है। उसे खामियाजा भुगतना होगा। जब तक इंटक को प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाएगा, तब तक जेबीसीसीआइ-11 की कोई बैठक नहीं होने दी जाएगी। हम प्रबंधन की प्रतिक्रिया का इंतजार करेंगे और इसी वजह से कुछ-कुछ अंतराल पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा। पिछली बार हमने मजदूर हित में बैठक होने दी जिसका परिणाम रहा कि मजदूर छले गए। इस बार प्रबंधन व किसी अन्य श्रमिक संगठन को हम वाकओवर देने के मूड में नहीं हैं।

Edited By: Atul Singh