सिंदरी [बरमेश्वर]। प्रकाश का एक खास गुण है कि वह सीधी रेखा में ही चलता है। उसकी राह में कोई वस्तु रख दी जाए तो वह उसे रोशन कर देता है। उससे आगे नहीं बढ़ता। प्रकाश के इस गुण के आधार पर सिंदरी के अभियंत्रण संस्थान बिरसा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाजी में सिविल इंजीनियरिंग के बीटेक प्रथम वर्ष के छात्र इमरान नजीर ने भूकंप से भवनों की सुरक्षा के लिए वॉल ई-रेक्टीफाइड उपकरण बना रहे हैं। जो लगभग बन चुका है। इसका प्रदर्शन वे बीआइटी मॉडल क्लब के प्रतिष्ठित वाॢषक टेक-फेस्ट 'संधान' में करेंगे। यह भवन की दीवार बनने के दौरान हुई खामियों की तुरंत जानकारी दे देगा। उसे अभियंता दूर कर सकते हैं।

इमरान ने बताया कि अक्सर भवन बनाने में अकुशल मजदूर कई गलतियां कर जाते हैं। ऐसी दीवारें बना देते हैं जो बिल्कुल सीधी न होकर कहीं कहीं हल्की टेढ़ी हो जाती हैं। दो ईंटों के बीच अधिक जगह छोड़ देते हैं। भूकंप या भूस्खलन के दौरान यह दीवारें हल्के से कंपन में ही गिर जाती हैं। पुल बनाने, बड़े भवन बनाने में करोड़ों की रकम खर्च होती है, जो ऐसी खामियों के कारण पानी में चली जाती है। इस समस्या का निदान खोजने में प्रकाश के गुण का प्रयोग उपकरण में किया है। हमने यह आइडिया टेकी ऑफ द इयर प्रतियोगिता में दिया था। वहां उसे चयनित कर लिया गया। अब संधान में उपकरण का प्रदर्शन करेंगे। उपकरण के सहारे मजबूत दीवार का निर्माण संभव हो सकेगा। अभियंता कोई गलती करेगा तो उसकी पहचान करेगा।

द वार निर्माण के दौरान ऐसे काम करेगा उपकरणः दीवारों को बनाने के दौरान वह जरा सी भी टेढ़ी हुई तो उपकरण से निकल रही लेजर लाइट उसे पकड़ लेगी। यह हर ईंट पर नजर रखेगी, जहां भी दीवार बनने में खामी हुई है, वहां वह लाइट रुक जाएगी। उससे आगे नहीं बढ़ेगी। बस इंजीनियर गलती को दुरुस्त कर लेंगे। दीवार बनाने में हुई खामी की जानकारी उपकरण में लगे एलसीडी डिस्प्ले में दिख जाएगी।

प्रॉक्सी लेजर लाइट का उपकरण में हुआ प्रयोग : इमरान ने बताया कि अपने उपकरण में प्रॉक्सी लेजर लाइट, एलसीडी डिस्प्ले, आर्डरुइनो (सर्किट बोर्ड), नौ वोल्ट की बैट्री व सेंसर का प्रयोग किया है। उपकरण बनाने में 600 रुपये की लागत आई है। उपकरण दीवार बनने के दौरान ईंट के .01 डिग्री कोण के भी विचलन तक को पकड़ लेगा।

Posted By: Mritunjay

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