कोयले की सप्लाई को लेकर PMO की हाईलेवल मीटिंग, रेलवे और कोल इंडिया को दिया सख्त आदेश
केंद्र सरकार ने बिजली घरों में कोयले की निर्बाध आपूर्ति और पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश दिए ...और पढ़ें

बिजली घरों में कोयले की कमी बर्दाश्त नहीं, उच्चस्तरीय बैठक में स्टॉक बनाए रखने का निर्देश (AI Generated Image)
HighLights
बिजली घरों में कोयले की कमी न हो, निर्देश।
पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने, आपूर्ति बढ़ाने पर जोर।
रेलवे-कोयला कंपनियों को समन्वय से काम करने का आदेश।
जागरण संवाददाता, धनबाद। देश के बिजली घरों में कोयले की निर्बाध आपूर्ति और पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिया गया कि किसी भी परिस्थिति में बिजली घरों में कोयले की कमी नहीं होनी चाहिए।
बिजली घरों में उपलब्ध कोयले का स्टॉक बनाए रखने के साथ जरूरत के अनुसार आपूर्ति बढ़ाने और कोयले की ढुलाई में तेजी लाने पर विशेष जोर दिया गया। इसके लिए रेलवे सहित संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने का निर्देश दिया गया।
बैठक में पीएम के सलाहकार तरुणा कपूर, कोयला सचिव विक्रम दत्त, कोल इंडिया के चेयरमैन बी. साइराम, एनटीपीसी के अध्यक्ष, रेलवे बोर्ड के सदस्य सहित संबंधित विभागों के सचिव स्तर के अधिकारी और निदेशक मंडल के सदस्य मौजूद थे।
कोल इंडिया की विभिन्न अनुषंगी कंपनियों के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (सीएमडी) ने भी बैठक में हिस्सा लिया। इनमें बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल, सीसीएल के सीएमडी एनके सिंह, ईसीएल के सीएमडी सतीश झा और एमसीएल के सीएमडी उदय कांत कावले सहित अन्य कोयला कंपनियों के प्रमुख शामिल थे।
बिजली घरों में कोयले का स्टॉक बनाए रखने पर जोर
बैठक में देश के बिजली घरों में कोयले की मौजूदा उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि बिजली घरों में कोयले का पर्याप्त स्टॉक बना रहे और किसी भी स्तर पर आपूर्ति बाधित नहीं हो।
इसके लिए उत्पादन से लेकर डिस्पैच और बिजली घरों तक कोयला पहुंचाने की पूरी व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखने को कहा गया।
कोयला कंपनियों को उत्पादन और आपूर्ति के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने तथा जरूरत के अनुसार डिस्पैच बढ़ाने पर जोर दिया गया। साथ ही रेलवे को कोयले की ढुलाई के लिए आवश्यक रैक और परिवहन व्यवस्था के समन्वय पर ध्यान देने का निर्देश दिया गया, ताकि बिजली घरों तक समय पर कोयला पहुंच सके।
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि कोयले की आपूर्ति में किसी तरह की कमी का असर बिजली उत्पादन पर नहीं पड़ना चाहिए।
रेलवे और कोयला कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय
कोयले की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए रेलवे और कोयला कंपनियों के बीच समन्वय को अहम माना गया। डिस्पैच बढ़ाने, ढुलाई की बाधाएं दूर करने और आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने पर चर्चा हुई। संबंधित विभागों को अपनी जिम्मेदारी के अनुरूप कदम उठाने को कहा गया, ताकि बिजली घरों में कोयले की उपलब्धता लगातार बनी रहे।
विकसित भारत-2047 के लक्ष्य पर भी चर्चा
बैठक में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए कोयला क्षेत्र की भूमिका और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों पर भी विस्तार से मंथन हुआ। देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने, कोयला उत्पादन में आत्मनिर्भरता बनाए रखने और बदलती ऊर्जा जरूरतों के अनुरूप दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने पर जोर दिया गया।
इसके अलावा नवीकरणीय ऊर्जा और कोयला क्षेत्र के बीच समन्वय, पर्यावरण अनुकूल खनन तथा ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों के बेहतर उपयोग जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। बैठक में कोयला कंपनियों को वर्तमान जरूरतों के साथ भविष्य की ऊर्जा मांग को ध्यान में रखकर उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था मजबूत करने का संदेश दिया गया।
उच्चस्तरीय बैठक में लिए गए निर्देशों के मद्देनजर कोल इंडिया और उसकी अनुषंगी कंपनियों के लिए बिजली घरों को पर्याप्त कोयला उपलब्ध कराना, डिस्पैच बढ़ाना और रेलवे के साथ समन्वय मजबूत करना प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
