IIT(ISM) Dhanbad धनबाद ने फ्लाई ऐश से बांधों को मजबूत बनाने की तकनीक का पेटेंट हासिल किया
आइआइटी आइएसएम धनबाद को अर्थन डैम निर्माण में फ्लाई ऐश-लाइम कोर तकनीक के लिए 20 साल का पेटेंट मिला है। ...और पढ़ें

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान ( भारतीय खनि विद्यापीठ)। (फाइल फोटो)
जागरण संवाददाता, धनबाद। आइआइटी आइएसएम धनबाद के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की शोध टीम ने अर्थन डैम निर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान की “अर्थन डैम स्ट्रक्चर विद कॉम्पैक्टेड क्ले–फ्लाई ऐश-लाइम कोर” तकनीक को भारत सरकार की ओर से 20 वर्षों के लिए पेटेंट मिल गया है।

आगे शोध टीम इस तकनीक में अलग-अलग सामग्री अनुपात और इसकी दीर्घकालिक क्षमता का अध्ययन करने की दिशा में काम करेगी। रिसर्च टीम के सदस्य सुबोध श्रीवास्तव ने भी पेटेंट मिलने की जानकारी साझा की है।
इस तकनीक का उद्देश्य अर्थन डैम के कोर में इस्तेमाल होने वाली प्राकृतिक क्ले के एक हिस्से के विकल्प के रूप में फ्लाई ऐश और लाइम से तैयार कंपोजिट सामग्री का इस्तेमाल करना है। इससे एक ओर प्राकृतिक मिट्टी पर निर्भरता कम करने की संभावना है, वहीं दूसरी ओर थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
छह माह में पूरी हुई शोध
इस शोध की शुरुआत मई 2025 में पीएचडी कार्यक्रम के तहत हुई थी। शोध को संस्थान के संसाधनों से बिना किसी बाहरी फंडिंग के पूरा किया गया। टीम ने अर्थन डैम के कोर में क्ले, फ्लाई ऐश और लाइम के मिश्रण की उपयोगिता पर काम किया।
तकनीक में कंपैक्टेड क्ले के साथ फ्लाई ऐश का इस्तेमाल किया जाता है और लाइम के जरिये मिश्रण को स्थिर किया जाता है। शोध टीम के अनुसार, इस तरह तैयार मिश्रित पदार्थ का उद्देश्य बांध के कोर में पानी के रिसाव को नियंत्रित करने के साथ संरचना की मजबूती और स्थिरता में सुधार करना है। हालांकि बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से पहले इसके फील्ड स्तर पर परीक्षण और आर्थिक आकलन जरूरी होगा।
चार शोधकर्ताओं ने मिलकर किया काम
इस पूरे शोध में आइआइटी आइएसएम के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के शोधार्थी सुबोध श्रीवास्तव, एसोसिएट प्रोफेसर डा. विश्वनाथ एन. खत्री, पूर्व शोधार्थी एवं बीआइटी मेसरा के सहायक प्राध्यापक डा. आशेष बनर्जी और संस्थान के पूर्व विभागाध्यक्ष स्वर्गीय डा. श्रीनिवास पसुपुलेटी शामिल थे।
पेटेंट मिलने के बाद सुबोध श्रीवास्तव ने इसे टीम के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया और संस्थान से मिले शोध वातावरण व सहयोग के प्रति आभार जताया।
फ्लाई ऐश के उपयोग से टिकाऊ निर्माण की संभावना
अर्थन डैम में पानी के रिसाव को नियंत्रित करने के लिए कोर की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में क्ले की जगह या उसके साथ वैकल्पिक सामग्री का इस्तेमाल उन क्षेत्रों में उपयोगी हो सकता है, जहां प्राकृतिक उपयुक्त मिट्टी सीमित मात्रा में उपलब्ध है और फ्लाई ऐश पर्याप्त मात्रा में मिलती है।
हालांकि, इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाने से पहले अलग-अलग अनुपात में क्ले, फ्लाई ऐश और लाइम के मिश्रण की क्षमता, दीर्घकालिक व्यवहार, निर्माण लागत और वास्तविक परिस्थितियों में प्रदर्शन का विस्तृत परीक्षण किया जाना बाकी है।
दिवंगत डा. पसुपुलेटी के योगदान को किया गया याद
पेटेंट मिलने के समय टीम ने स्वर्गीय डा. श्रीनिवास पसुपुलेटी के योगदान को भी याद किया गया। उनका 9 जून 2026 को निधन हो गया था।
शोध टीम में शामिल उनके योगदान के कारण यह उपलब्धि उनके लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। टीम के अनुसार, पेटेंट उनके शोध योगदान को याद करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
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