धनबाद : विश्व स्तर पर बढ़ते प्रदूषण के लिए काफी हद तक हानिकारक रसायन जिम्मेदार है। जब तक इनका बेहतर व पर्यावरण के अनुकुल विकल्प नही तलाशा जाएगा पर्यावरण को होने वाला नुकसान को नही रोका जा सकेगा। उक्त चिंता मंगलवार को आइआइटी आइएसएम मे ग्रीन एंड सस्टेनेबल केमिस्ट्री : रोल ऑफ कैटेलिस्ट विषय पर इंडो - फ्रेंच विशेषज्ञो द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला मे दोनो देशो के विशेषज्ञो द्वारा व्यक्त की गई। कार्यशाला मे भारत के 11 व फ्रांस के चार विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे है। इस मे फ्रांस से आए आरकेमा इंडस्ट्रीज के निदेशक डीएन ड्यूबॉन ने अपनी कंपनी द्वारा बनायी जा रही है बायोडिग्रेबल (पर्यावरण के अनुकुल) पेट के संबंध मे विशेषज्ञो को बताया। उन्होने बताया कि उनकी कंपनी खाद्य तेलो की मदद से पेट तैयार कर रही है। इससे पर्यावरण को बिल्कुल नुकसान नही होता है। कार्यशाला मे विभन्न उत्पादो पर चर्चा मे इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स और उनसे पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा किया। कार्यशाला का आयोजन आइआइटी आइएसएम की अप्लाइड केमिस्ट्री व इंडो फ्रेंच फोरम फॉर प्रमोशन ऑफ एडवांस रिसर्च द्वारा किया गया। इससे पहले कार्यशाला का उद्घाटन फोरम के अध्यक्ष डॉ. मुकेश कुमार व आइएसएम निदेशक डॉ. डीसी पाणिग्रही ने किया। इसमे फ्रांस के चार और भारत के 11 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। जिसमे आइआइटी चेन्नई और आइआइटी बॉम्बे के भी प्रतिनिधि भी शामिल है।

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