जागरण संवाददाता, मैथन/ निरसा। एमपीएल के चालू होने के लगभग 11 साल बाद रेलवे लाइन का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद ट्रायल भी शुरू हो चुका है। बहुत जल्द एमपीएल में कोयले की आपूर्ति रेलवे वैगन के माध्यम से होने लगेगी। वहीं दूसरी ओर रेलवे लाइन चालू होने की बात सामने आने के साथ ही अभी तक एमपीएल के कोयला ढुलाई कार्य में लगे हाइवा मालिकों के पेशानी पर बल पड़ गया है । इसे लेकर निरसा के हाइवा मालिक आंदोलन का मूड बना चुके हैं। इसी कड़ी में मंगलवार की देर शाम रेलवे ट्रैक की जांच में आए टावर वैगन को हाईवा मालिकों ने लौटा दिया और अब बुधवार को रेलवे ट्रैक पर पदयात्रा करने वाले हैं।

इस संबंध में निरसा हाइवा परिवहन स्वावलंबी सहकारी समिति के संरक्षक संजय सिंह ने बताया कि हाइवा से एमपीएल के लिए कोयला ढुलाई के कारण लगभग 25 से 30 हजार लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार कर रहे हैं। हाइवा से कोयला ढुलाई बंद होने पर 30 हजार लोगों का रोजी रोजगार छिन जाएगा। हम लोग एमपीएल प्रबंधन से चाहते हैं कि लिखित आश्वासन दे कि रेलवे वैगन के माध्यम से 30 प्रतिशत ए हाइवा के माध्यम से 70 प्रतिशत कोयले की ढुलाई कम से कम एक वर्ष तक जारी रखा जाएगा। बाद में 50 -50 प्रतिशत हाइवा व रेलवे वेगन कोयले की ढुलाई हो। निरसा विधानसभा के लगभग 500 हाईवा मालिकों ने एमपीएल के लिए शुरुआत से अभी तक कोयले की ढुलाई काम में सहयोग किया है। एशिया महादेश का एमपीएल पहला प्लांट है जिसमें लगातार 10 वर्षों से ज्यादा समय तक कोयले की ढुलाई का कार्य हाईवा के माध्यम से होते आ रहा है। हाईवा मालिकों ने सहयोग किया तभी प्लांट चालू रहा और अब जाकर रेलवे लाइन तैयार हुआ है।

रेलवे बैंगन के माध्यम से कोयला ढुलाई शुरू होने पर हाइवा मालिकों को कैसे रोजी रोजगार से जोड़ा जाएगा इसके लिए चिंतन मनन भी एमपीएल प्रबंधन एवं प्रशासन के लोगों को करना होगा। क्योंकि हाइवा मालिक निरसा विधानसभा के ही रहने वाले हैं। उनके रोजी रोटी की व्यवस्था करना भी प्रशासन व जनप्रतिनिधियों का दायित्व बनता है। उन्होंने कहा कि यदि हाईवा मालिकों के रोजी रोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं होती है तो हम लोग एमपीएल को रेलवे वैगन से कोयले ढुलाई नहीं होने देंगे।

Edited By: Mritunjay