धनबाद [दीपक कुमार पाण्‍डेय]: बरवाअड्डा चौक से भी करीब सात किलोमीटर दूर से बसंती देवी धनबाद आती है... हर रोज। कभी पति यहां छोड़ जाता है तो कभी बेटा। बरटांड़ में सिंफर के सामने वह सब्जियों की दुकान लगाती है। कुछ सब्जियां घर की तो कुछ व्‍यवसायी से खरीदी हुई। रविवार की सुबह भी वह ढेर सारी सब्जियां लेकर पहुंची। उम्‍मीद थी कि आज छुट्टी का दिन है तो कमाई अच्‍छी होगी। नौकरीपेशा लोग रविवार के दिन निकलते हैं तो फिर थोक में स‍ब्‍जी लेकर घर लौटते हैं।

हालांकि इस रविवार बसंती की किस्‍मत ने उसका साथ नहीं दिया। सुबह दुकान सजाते कुछ लोग आए और फरमान सुनाया कि अभी दो दिन यहां नजर भी मत आना। साहब आने वाले हैं। कोई दुकान नहीं लगेगी। दिनभर इसी तनाव में डूबी बसंती ने दिनभर औने-पौने दाम में सब्‍जी बेची। कुछ यही हाल गोविंदपुर के करीब से आनेवाली नसरीन का भी था। ग्राहकों को बता रही थी- जो लेना है, आज ले लीजिए... कल सब्‍जी नहीं मिलेगी! लोगों ने पूछा तो कहा- क्‍या पता, शायद शिबू सोरेन या कोई आ रहे हैं। इसलिए आज ही हमें दुकान लगाने से मना कर दिया गया है।

सोमवार को सीएम हेमंत सोरेन धनबाद आ रहे हैं। अपने दो घंटे के दौरे में वह यहां करीब पांच सौ करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं का शिलान्‍यास और उद्घाटन करने के साथ परिसंपत्तियों का वितरण भी करेंगे। हालांकि उनके इसी दो घंटे के दौरे की भेंट 50 से अधिक परिवारों की दो दिन की दाल-रोटी चढ़ गई। वैसे तो सीएम बनने के बाद भी हेमंत सोरेन कई मौकों पर धनबाद आए, लेकिन यहां उन्‍होंने किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्‍सा नहीं लिया। कोरोना की वजह से कोई कार्यक्रम आयोजित भी नहीं हुआ। लेकिन इस बार करीब दो साल बाद सीएम आ रहे हैं तो जिला प्रशासन की तैयारी पूरी है। सड़कों पर वर्षों से जमीं दुकानें क्‍या, मिट्टी तक हटाई जा रही है।

कहा- खुद निगम वाले कह गए हैं- दो दिन बाद दुकान लगा लेना...

रानी तालाब के सामने शाम करीब पांच बजे जिला प्रशासन का बोर्ड लगी एक सफेद बोलेरो मंडरा रही थी। हालांकि यह बोलेरो कम, यहां रोड किनारे लगी दुकानों के लिए बुलडोजर अधिक साबित हुई। इसके गुजरते ही इलाका साफ हो गया। दुकानों की बांस-बल्लियां उखड़ गईं और सड़कें चौड़ी नजर आने लगीं। यहां कोने पर ही चिकेन की दुकान लगाने वाले ठाकुर कुल्‍ही के सोनू ने बताया कि दुकान उजड़ी है, लेकिन निगम वाले खुद कह गए हैं कि दो दिन बाद दुकान लगा लेना!

बहरहाल, सोमवार को जब सीएम एयरपोर्ट से होकर गुजरेंगे तो साफ-सुथरी, चौड़ी सड़क उनके कदमों के नीचे बिछी होगी। रविवार की शाम जब दुकानें हटाई जा रही थीं तो कुछ लोग यह भी कहते दिखे कि सडक इतनी चौड़ी है, यह तो कभी पता ही नहीं चलता है। आधे पर दुकान लगी होती है तो बाकी आधे पर गाडि़यां खड़ी होती हैं। मुश्किल से हम चल पाते हैं। अच्‍छा ही हुआ, सीएम आ रहे! उन्‍हीं के बहाने हम भी इस चौड़ी सड़क का सुख भोग लेंगे। वहीं 50-60 परिवार ऐसे भी हैं, जो सीएम के आने से अधिक, उनके जाने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि फिर उनकी दुकानें सजें, और हर दिन कमाने-खाने वालों की दाल-रोटी चल सके।

Edited By: Deepak Kumar Pandey