धनबाद/ गोड्डा, जेएनएन। लोकसभा चुनाव- 2019 में भाजपा की स्टार प्रचारक केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और गोड्डा के भाजपा प्रत्याशी रहे निशिकांत दूबे द्वारा झाविमो उम्मीदवार प्रदीप यादव के खिलाफ आपत्तिजनक शब्द प्रयोग करने के मामले की सुनवाई अब धनबाद के फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी। गोड्डा सिविल कोर्ट में प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी रवि कुमार भास्कर की अदालत ने शनिवार को सुनवाई करते हुए मामले को धनबाद फास्ट ट्रैक कोर्ट में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। 

बता दें कि गत लोकसभा चुनाव के दौरान 11 मई 2019 को गोड्डा के देवदांड़ में भाजपा की और से चुनावी सभा आयोजित की गई थी। झाविमो प्रत्याशी प्रदीप यादव के चुनाव अभिकर्ता संजीत अग्रवाल ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी कि इस सभा में भाजपा की स्टार प्रचारक केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और गोड्डा से भाजपा प्रत्याशी रहे निशिकांत दूबे ने प्रदीप के खिलाफ आपत्तिजनक शब्द का प्रयोग किया था। इसके बाद आयोग ने उक्त सभा के वीडियो फुटेज के आधार पर देवदांड़ थाने में स्मृति ईरानी और डॉ. निशिकांत दुबे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप के अनुसंधान के आलोक में देवडांड़ पुलिस ने साक्ष्य के अभाव में कोर्ट में अंतिम प्रतिवेदन समर्पित किया था, लेकिन कोर्ट ने कांड के सूचक के प्रतिवाद के बाद उक्त मामले को फिर से संज्ञान लेते हुए इसे धनबाद के फास्ट ट्रैक कोर्ट को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया।

सुनवाई करते हुए प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी रवि कुमार भास्कर ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि अश्विनी कुमार उपाध्याय बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से 14 दिसंबर 2017 को पारित आदेश में कहा गया है कि झारखंड राज्य में चुने गए सांसद, विधायकों के विरुद्ध दर्ज आपराधिक मामले के त्वरित निष्पादन के लिए राज्य सरकार से परामर्श के बाद रांची एवं धनबाद में जिला न्यायाधीश स्तर के विशेष न्यायालय का गठन किया गया है। यह फास्ट ट्रैक कोर्ट है। इसलिए स्मृति ईरानी और निशिकांत दुबे के मामले की सुनवाई अब धनबाद में ही होगी।

झाविमो प्रत्याशी प्रदीप यादव पर उनकी ही पार्टी की एक नेत्री ने तीन मई 2019 को छेडख़ानी का मामला दर्ज कराया था। इधर, चुनावी सभा में दिए गए बयान के आधार पर अग्रवाल ने आयोग को बताया कि भाजपा के मंच से प्रदीप यादव के खिलाफ दुष्प्रचार किया गया था, जिससे उनकी छवि धूमिल हुई थी।

आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का मामला सिद्ध होने पर दो से तीन साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। दर्ज मामले में जमानतीय धराएं लगाई गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आलोक में अब लोक प्रतिनिधित्व कानून सहित सांसद विधायक पर लंबित आपराधिक मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी।

- योगेश चंद्र झा, अधिवक्ता, गोड्डा।

 

Posted By: Mritunjay

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